संवाद सूत्र ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा
पुडुचेरी विश्वविद्यालय छात्र परिषद चुनाव के पहले चरण के बाद दूसरे चरण के चुनाव में भी SFI की ऐतिहासिक जीत हुई है। यह जीत युवाओं और Gen Z की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में संघ परिवार की विचारधारा थोपने के प्रयासों तथा सार्वजनिक शिक्षा को कमजोर करने वाली नवउदारवादी नीतियों के खिलाफ व्यक्त किए जा रहे असंतोष का एक महत्वपूर्ण संकेत है। पुडुचेरी विश्वविद्यालय में SFI की जीत को केवल एक चुनावी परिणाम के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह मौजूदा व्यवस्था और RSS के नेतृत्व वाली BJP सरकार की नीतियों को लेकर युवाओं के बीच उठ रहे राजनीतिक सवालों और चिंताओं को भी सामने लाती है। यह जीत ऐसे समय में हुई है जब देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन और जमीनी आंदोलन तेज हो रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के विभिन्न राज्यों की राजधानियों तक छात्र और आम लोग अपनी नाराजगी और विरोध दर्ज करा रहे हैं। “Gyanesh, it’s done bro” का नारा इस विरोध और असहमति की अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया है। इस संदर्भ में पुडुचेरी विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध कॉलेजों में SFI की जीत SIR और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ व्यापक संघर्ष के साथ छात्र समुदाय की एकजुटता की अभिव्यक्ति के रूप में सामने आई है। यह जीत छात्रों के बीच लोकतांत्रिक अधिकारों और लोकतांत्रिक स्थानों को लेकर बढ़ती सक्रियता को भी दर्शाती है। पुडुचेरी विश्वविद्यालय में SFI की जीत सांप्रदायिक राजनीति, नवउदारवादी शिक्षा नीतियों और लोकतांत्रिक संस्थानों एवं छात्र लोकतंत्र को कमजोर करने के प्रयासों के खिलाफ छात्रों की आवाज को सामने लाती है। कॉमरेड अरुंधति और कॉमरेड नल्लासेलवन को पुडुचेरी विश्वविद्यालय छात्र परिषद 2026–27 के क्रमशः अध्यक्ष और सचिव के रूप में निर्वाचित हुए. SFI की ऐतिहासिक जीत के लिए पुडुचेरी विश्वविद्यालय के सभी छात्रों और साथियों को SFI बिहार राज्य कमिटी की ओर से बधाई व शुभकामनाएं! क्रांतिकारी लाल सलाम,
लड़ेंगे जीतेंगे
पढ़ाई लड़ाई साथ-साथ
SFI


