डीके अकेला का रिपोर्ट
विधानसभा चुनाव के पहले चरण के १५२ और दूसरे चरण में कल 142 सीटों पर वोट डाले गये। मोदी ने दावा किया है कि बंगाल में अब बीजेपी सरकार बनाएगी और वे शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने आएंगे। लेकिन सवाल उठता है कि ये आत्म विश्वास उन्हें कहाँ से मिल रहा है ? क्या चुनाव आयोग ने उन्हें जीत की गारंटी दे दी है ? क्या केंद्रीय सुरक्षा बल और बाहर से भेजे गए प्रेक्षकों की भूमिका की वज़ह से वे इतने आश्वस्त हैं…. यही हो सकता है क्योंकि जिस हिंदुत्व को लेकर वे और उनकी पार्टी चुनाव मैदान में तलवारें भाँज रहे थे,उनकी धार भोथरी साबित होती दिख रही है। बांग्ला अस्मिता और संस्कृति का कार्ड खेलकर टीएमसी ने ऐसे हालात बना दिए हैं कि हिंदुत्व कार्ड बैक फ़ायर कर सकता है। ममता बैनर्जी ने बांग्ला अस्मिता को इमोशनल और सांस्कृतिक बना दिया है। मसलन, बंगाल में मछली-मांस का कार्ड को ले लीजिए। ममता बार-बार कह रही हैं — “BJP सत्ता में आई तो मछली,अंडा,मांस खाना बंद करवा देगी।”
उन्होंने बिहार-यूपी-राजस्थान में मांस-मछली की दुकानों पर हमलों और दिल्ली में बंगाली बोलने वालों पर “हमले” का जिक्र किया। यह बंगाली समाज के खान-पान को सीधे “बंगाली अस्मिता” से जोड़ता है। इसके अलावा उनकी पार्टी ने “जोतोई कोरो हमला, आबार जितबे बांग्ला!” और “बांग्ला निजेर मेये केई चाय” (बंगाल अपनी बेटी यानी ममता को चाहता है)। यही दबाव था कि BJP मछली बाजारों में कैंपेन करती नज़र आई। बीजेपी उम्मीदवार डॉ. शरद्वत मुखोपाध्याय बिधाननगर में ‘कतला’ मछली लटकाकर घूमे, दिलीप घोष खड़गपुर में मछली बाजार गए, सुकांत मजूमदार ने बालुरघाट के मछली बाजार से शुरूआत की।
अनुराग ठाकुर को मंगलवार के दिन मछली खाते हुए वीडियो भी इसीलिए जारी करना पड़ा। यही नहीं, BJP मेनिफेस्टो और रैलियों में अब सिर्फ “जय श्री राम” नहीं, बल्कि “जय मां काली-दुर्गा”, टैगोर और बंगाली भाषा के पोस्टर इस्तेमाल कर रही है। लेकिन इसके बावजूद मोदी, शाह से लेकर योगी तक सब हिंदुत्व पर ज़ोर दिया। अस्सी-बीस और घुसपैठियों का नरैटिव बनाने की भरपूर कोशिश की।

