महिला आरक्षण के लिए नहीं बल्कि परिसीमन हेतु लोकसभा में पेश बिल में सतापक्ष की हार

डीके अकेला का रिपोर्ट


नवादा , २५ अप्रैल : पिछले दिनों लोकसभा में एनडीए द्वारा कोई महिला आरक्षण के लिए नहीं बल्कि परिसीमन हेतु बिल पेश किया गया था, जिसमें सत्तापक्ष की जबर्दस्त हार हुई। प्रश्न खड़ा है कि भारत के लोकसभा में पूर्व से मौजूद ५४३सांसद क्या कम पड़ रहे हैं, जो जनता की गाढ़ी कमाई में टैक्स का रूपये लूटने में, जो अब सांसद की संख्या ८५० की जा रही है। महिलाओ को सिर्फ़ ३३% आरक्षण की नहीं बल्कि इमानदारी से ५०% का सबल समर्थक हूं। लेकिन लोकसभा में मौजूद ५४३ में ही ५०%महिला को आरक्षण की गारंटी करो। न कि,८५० में ५०% आरक्षण हो।
543 सांसद कम पड़ रहे है देश की जनता के टैक्स का पैसा लूटने में, जो अब इनकी संख्या 850 की जा रही है मै महिलाओं के 33% आरक्षण के समर्थन में हूँ, लेकिन उनको ये 33% 543 सीटो में से दे दीजिए। अगर महिला आरक्षण के लिए इतना बेचैन और हितैषी हैं तो ५५३ में ५०%आरक्षण देने में कौन राह में रोड़ा बनके अटका हुआ है? 850 लोकसभा सीट करके कौन देश की आर्थिक स्थिति पर बोझ डाला जा रहा है ,सारी सैलरी भत्ते ,फंड यात्राएं , दैनिक भत्ते , फोन , मेडिकल सुविधा आदि मिलाकर 5 लाख रुपया से ज्यादा हर सांसद को प्रति महीने जा रहा। गुलछरा सब उड़ा रहे हैं। पांचों अंगुली घी में ही है।
काम जीरो , रिस्पॉनबल्टी जीरो , ऊपर से इनको Y+ सिक्योरिटी और विकास कार्यों में से कमीशन भी मिलता है ।
चारों और से देश को लुटा जा रहा है । ये सब परमूडी फला हार करने वाले हैं। सांसद बढ़ेंगे तो विधायक, एमएलसी सभी बढ़ जाएंगे। इसका बोझ कैसे उठेगा
अब सांसद 543 से 850 होंगे , उसके बाद विधायकों की संख्या तो सीधे सीधे 2 से 3 हजार बढ़ेगी , कितना ज्यादा रुपया इनकी सैलरी और सिक्योरिटी में जाएगा देश कहा जाएगा ,? क्या देश को अँखमुंदकर रसातल भेजने पर आखिर क्यों तुले हैं? और इसे अच्छी तरह गठिया लो इस 33% में से कोई भी गरीब मजदूर किसान या मध्यम वर्ग की महिलाएं सांसद नहीं चुनी जाएगी, चुनी जाएगी खानदानी, उद्योगपति, फिल्मी हस्तियां, राजनितिक पार्टियों और कॉर्पोरेट घरानों की पारिवारिक महिला सदस्यों इत्यादि। कार्यकर्ताओं को केवल झूठा आश्वासन। महंगाई, बेरोजगारी, ग़रीबी, अशिक्षा, भूख, दमन व उत्पीड़न आदि तो मेहनतकशों को मिलना सुनिश्चित है। ये सीटे बढ़ाकर तो आप अपना राजनीतिक स्वार्थ साध रहे हो और देश की जनता पर बोझ डाल रहे हो। क्या यह देश प्रेम है या देशद्रोह ? अपना काम बनता और भाड़ में जाएं जनता वाली कहा बत को चरितार्थ कर दिया। एक आम आदमी की सोच देश के कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल करने पर , शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा से देश कंगाल हो जाएगा और इन माननीयों को चार-चार, कमीशन और इच्छानूसार बैंक लोन लेने एवं पेंशन देने पर देश विकास की राह पर चलेगा और भारत विश्व गुरु बनेगा या विश्व के चेला बनेगा जरा गौर से सोचिए ??