सुनील कुमार सिंह खबर सुप्रभात समाचार सेवा
इसी नवम्बर महिना की 6 तारीख को धनतेरस एवं 8 तारीख को दीपावली का त्यौहार मनाया जायेगा । लोग बाग दीपावली की तैयारी में लग चुके हैं । घरों की साफ – सफाई एवं रंग – रोगन किए जा रहे हैं। धनतेरस को लोग बड़ी संख्या में सोनें – चाँदी के आभुषण, चाँदी के सिक्के, पीतल के बर्तन, झाडू एवं नमक की खरीदारी करते हैं । दीपावली के दिन माता लक्ष्मी एवं गणेश की छोटी प्रतिमा घरों में पूजन कर स्थापित किया जाता है। पूजा के लिए तरह- तरह की रंग – बिरंगी मिठाईयों की खरीदारी हर घरों में की जाती है। गणेश जी को मोदक प्रिय ( लड्डू ) है। दुकानों में रात – दिन कारीगर मिलावटी सामान से लड्डू एवं अन्य आकर्षक मिठाईयाँ बनानें में जुट गये हैं। इस खबर के माध्यम से सावधान करना मेरा मकसद है – मिठाईयाँ खरीदें तो खुब जाँच – परखकर । खबर सुप्रभात न्यूज पोर्टेल के प्रतिनिधि के द्वारा कई मिठाई के छोटी -बड़ी दुकानों पर जाकर देखा गया जहाँ तीन – चार दिन पूर्व से ही कारीगर दीपावली को लेकर रंग – बिरंगी मिठाईयाँ बनानें में लगे हैं। किसी भी मिठाई की दुकानों में दुध से रसगुल्ले या क्रीम की मिठाईयाँ तैयार होते नहीं देखा । बाजार से सागर नाम से सुखे दुध के पाउडर को पानी में घोलकर 25 % पैकेट वाला सुधा दुध मिलाकर छेना फाड़ा जा रहा है। इसी छेना में मैदा एवं अरारोट पाउडर तथा सुज्जी मिलाकर खुब मला जा रहा है । तत्पश्यात गोल एवं लम्बा आकार में लड्डू बनाकर चीनी के उबलती चासनी में डालकर खुब खोलानें के बाद ट्रे में सजाकर उपर से नारीयल का बुरादा, काजु, रंगीन चीज से सजाकर काउन्टर में विक्री हेतु रखे गये हैं। मोतीचुर लड्डू, मुखदल एवं सोन पपड़ी में 50 प्रतिशत अरवा चावल का पिसान एवं 50 प्रतिशत बेसन मिलाकर बनाये जाते हैं। रंगीन बनानें के लिए लाल -पीला चम्पई रंग का प्रयोग किया जाता है। इन मिलावटी महंगी मिठाईयों से तो बेहतर होगा कि लक्ष्मी – गणेश जी के पूजन में केला -सेव, सुखे मेवे ( काजु, किश्मीस, बादाम गिरी, खजुर, पिस्ता ), मिश्री ही चढ़ायें तो बेहतर होगा। पैसा भी कम खर्च, मिलावटी सामान खरीदने से भी बचे रहेंगें । वैसे लोगों की अपनी मर्जी । मेरा मकसद तो सिर्फ आमजन को सावधान करना है।


