औरंगाबाद: अम्बुज कुमार खबर सुप्रभात समाचार सेवा
पहले चुनाव आयोग जाने से रोका, फिर एफआईआर ठोकी, और आज जंतर-मंतर जाने से भी रोककर हिरासत में ले लिया। सांसदों की बस रोक दी गई, श्री राहुल गांधी और श्रीमती प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया गया और सांसदों के साथ धक्का-मुक्की हुई। जंतर-मंतर वह जगह है जहां देश का आम नागरिक भी अपनी आवाज उठाने जाता है। अगर

नेता प्रतिपक्ष और सांसद वहां भी नहीं जा सकते, तो यह लोकतंत्र नहीं, डरी हुई सत्ता की तानाशाही है। एफआईआर और हिरासत से रोक पाओगे गांधी परिवार को? 1977 में इंदिरा जी को भी गिरफ्तार कराया गया था। 1980 में जनता ने उन्हें प्रचंड बहुमत से सत्ता में लौटा दिया, और गिरफ्तार कराने वाली सरकार बिखरकर इतिहास बन गई। यह सब भागवत-मोदी-शाह की “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे” वाली कार्रवाई है। ये भूल गए कि श्री राहुल गांधी का मंत्र है: डरो मत। कांग्रेस का कार्यकर्ता हर एफआईआर और हर तानाशाही हथकंडे को लोकतंत्र बचाने की लड़ाई का तमगा मानता है। सत्ता जितना रोकेगी, आवाज उतनी ही बुलंद होगी।