आलोक कुमार, संपादक सह निदेशक ख़बर सुप्रभात
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का जुमला पढ़ रहे हैं। 2047 तक या पहले भी भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरे यह हमारे लिए ही नहीं पुरे भारतवासियों के लिए एक गर्व का विषय होगा। लेकिन प्रधानमंत्री 2047 तक प्रधानमंत्री रहेंगे यह गारंटी कौन करेगा? जिस तरह देश में आरएसएस व

भाजपा धर्म के नाम पर बैकवर्ड – फारवर्ड व दलित के नाम पर नफ़रत फैलाने का काम यूजीसी जैसे संसद में बिल लाकर कर रही है और इस बिल को सर्वोच्च न्यायालय तक अस्वीकार कर दिया तो आखिर प्रधानमंत्री वास्तव में 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या फिर सबको खाता में 15 लाख भेजेंगे के तरह जुमला पढ़ रहे हैं यह एक अहम सवाल बना हुआ है। प्रधानमंत्री का 2047 तक विकसित भारत का ढकोसला को यदि समझना है तो इसके लिए विस्तार से समझने की जरूरत है। देश के राष्ट्रीय वजट में शिक्षा के नाम पर मात्र ०2प्रतिशत , स्वास्थ्य के नाम पर ०2प्रतिशत , ग्रामीण विकास के मद्द में वजट का हिस्सा घटा दिया गया, कृषि के क्षेत्र में वजट का हिस्सा भी घटाया गया,125दिनरोजगार के लिए रामजी योजना (मनरेगा ) जैसे अतिमहत्वपूर्ण योजना के लिए वजट में पर्याप्त राशि का आवंटन नहीं होना, आयुष्मान भारत के नाम पर एक ही अंक 9-9-9-9 नम्बर पर 10 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन, CAG रिपोर्ट के अनुसार आयुष्मान भारत के नाम पर 6.25 करोड़ रुपए का फ्राड किया गया तो फिर 2047तक विकसित राष्ट्र बनाने का सपना एक जुमला नहीं तो और क्या हो सकता है। पुछता है भारत की क्या अस्वस्थ और अशिक्षित भारत 2047तक विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है? पुछता है भारत की क्या मंदिर, मस्जिद और शिवालय के नाम, बैकवर्ड -फार्वड और दलित के नाम पर नफ़रत फैला कर2047तक विकसित भारत बनाया जा सकता है? पुछता है भारत की आखिर अभी तक RSS के प्रमुख किसी दलित, पिछड़े या आदिवासी समाज से कोई भी व्यक्ति क्यों नहीं बनाया?

