धान की रोपनी शुरू होते ही रासायनिक उर्वरकों की मारामारी शुरू

खबर सुप्रभात सामाचार सेवा


अगस्त माह की शुरुआत होते ही धान की रोपनी पुरे जिले में जोर -शोर से शुरू हो चुकी है। नहरों से आच्छादित क्षेत्रों में धान की रोपनी निर्वाध गति से चालु है तो वहीं मदनपुर, देव तथा रफीगंज प्रखंड़ो में जहाँ नहर की सुविधा बहाल नहीं हो सकी है, उन जगहों पर वर्षा एवं मोटर पंप से धान की रोपनी का काम शुरू हो चुका है। हाँ, बिजली की कटौती एवं वर्षा के अभाव में धान की रोपनी काफी प्रभावित हो रही है।
धान की रोपनी करते समय किसानों को डीएपी उर्वरक की आवश्यकता प्रति विघा 50 किलो ( 2 kg 500 ग्राम ) की दर से पड़ती है। फिर धान की रोपनी 20 दिनों की हो जानें पर घाँस की निकाई कर यूरिया खाद 60 kg प्रति विघा ( प्रति कट्ठा 3 Kg ) की दर से छिड़काव की जरूरत होती है। उसके बाद धान की रोपनी के 40 दिन बितनें के बाद प्रति विघा 40 Kg यूरिया (2 kg प्रति कट्ठा ) की दर से छिड़काव किया जाता है। इस बिच पानी की मात्रा खेत में एक से दो इंच बनाये रखा जाता है । तब जाकर धान की अच्छी पैदावार होती है। लेकिन अभी रोपनी शुरू ही हुआ है कि खाद के लिए किसानों के बिच मारामारी शुरू हो चुकी है। किसान डीएपी के लिए खाद विक्री केन्द्रों पर लाईन लगाकर घंटो इंतेजार में हैं, कि मेरी बारी कब आयेगी । जैसे ही विक्री काउन्टर से थोड़ा करीब किसान पहुँचता है तब खिड़की बंद कर नोटिश चिपका दिया जाता है कि माल खत्म हो गया, आनें से मिलेगा । जरा ठंढ़े दिमाग से सोचिए – उस किसान की मनोस्थिति । जो दिनभर बिना खाये – पिये, खेतों का काम छोड़कर डीएपी के लिए लाईन में लगा रहा और उसे दो – चार बोरा खाद नहीं मिला हो । ठीक ऐसी ही स्थिति गोह प्रखंड़ के विस्कोमान विक्री केन्द्र पर देखनें को मिला । तस्वीरें यह साफ ब्याँ करती है कि सरकार किसानों के प्रति कितना हितकारी एवं संवेदन शील है। माननिय कृषि मंत्री बिहार विजय सिंहा जी एवं जिलाधिकारी औरंगाबाद अभिलाषा शर्मा जी किसानों के प्रति कुछ तो संवेदनशील होईये । ये हमारे अन्नदाता हैं। किसानों के खुन और पसीना की जब आहुति होती है, तब अनाज के दानें निकलते हैं । पुरा जीव जगत इन्हीं अनाज के दानों से ही अपनी क्षुधा मिटाता है।