नवादा से डीके अकेला की रिपोर्ट
नवादा जिले में रजौली के अंतर्गत सोमवार की रात में अचानक हुई भारी मूसलाधार बारिश के बाद में ही योगीयमारन पंचायत के भंडारा गांव के नजदीक ही धनार्जय नदी पर बने ह्यूम पाइप पुलिया पानी के तीव्र बहती धारा में बह गई।इसके फलस्वरूप रजौली थाना क्षेत्र के भंडारा,राधे बिगहा के साथ ही चंदवारा आदि गांव के निरीह करीब 500 घरों के तकरीबन 10000 लोगों का संपर्क प्रखंड व अनुमंडल मुख्यालय से पूरी तरह कटकर संबंध विच्छेद हो गया है। इससे भारी संकट और बड़ी परेशानी के भवर में उबाडूबो होने से उबर नहीं पा रहे हैं।* क्या कहूं लाचारी – संकट आ पड़ी है भारी * ज्ञात हो कि ह्यूम पाइप की पुलिया टूटने के उपरांत वहां अब सिर्फ़ गहरा कटाव और खतरनाक जानलेवा खाई ही बची है। कमीशनखोरी की बुनियाद पर बने पुलिया की हुलिया बिगड़ना या टूटना तो लाज़मी ही था,जो लोगों के ऊपर मानो तो कहर बनकर आज हिमालय पहाड़ ही टूट कर सुखचैन को खदेड़ कर जिल्लत की जिंदगी जीने के लिए मजबूर व विवश कर दिया है। हालात इस संकटमय मुहाने पर आ खड़ी हो गई है कि छोटे छोटे स्कूली बच्चें सब पानी तथा कीचड़ के बीच से होकर सरकारी लापरवाही के चलते ही जान को जोखिम में डालकर गुजरने को मजबूर हैं। कहना बड़ा मुश्किल है कि यहां कभी भी कोई खतरनाक जानलेवा जबर्दस्त सनसनी फैला देने वाली घटिया हादसा हो सकता है। स्थानीय ग्रामीण कुंदन कुमार, प्रमोद कुमार यादव, गोपाल सिंह, भोला सिंह, अमरेंद्र सिंह,गोलू सिंह और दिनेश यादव आदि लोगों ने बताया कि इस मार्ग से आम लोगों के साथ ही साथ रेलवे लाइन का काम कर रही कंपनी के भारी वाहन भी तो नियमित इसी रास्ते से गुजरते रहते हैं। बालू की भीत व दुश्मन से प्रीति की दीवार पर खड़ी की गई पुलिया का तो एक दिन हश्र यही होना ही था, जिसका यह प्रत्यक्ष प्रमाण है।
विदित हो कि भारी वाहनों के आवागमन से यह रास्ता बिल्कुल बुरी तरह खराब एवं क्षतिग्रस्त हो गया है। ग्रामीणों में अमरेंद्र सिंह, ईश्वर राम, ब्रह्मदेव यादव एवं अन्य रंजीत राम ने खुलेआम कहा कि इस संवेदनशील मामले को लेकर कई बार प्रशासन के सभी संबंधित अधिकारियों से शिकायत और बातचीत की गई। प्रत्येक बार सिर्फ एक मात्र आश्वासन की कड़वा घुट पिलाकर की अपने कर्तव्यों का इतिश्री करते आ रहे हैं । बताते चलें कि बोर्ड पर भी योजनाएं सभी दर्ज हैं,पर मात्र कागजी पन्नों पर ही चल रही है,लेकिन धरातल एवं सरजमीं पर कुछ ही नहीं है। पुलिया की संपर्क टूटने से सबसे ज्यादा परेशानी बीमार लोगों और प्रसूत महिलाओं को बेहतर ईलाज के लिए अस्पताल ले जाने में घंटों समय लग जाते है। कभी- कभी तो अस्पताल पहुंचने के पहले ही रोगग्रस्त लोग रास्ते में में दम तोड़ कर स्वर्ग सिधार जाते हैं और यहां प्रसूत महिला का बच्चा तो अस्पताल परिसर पहुंचने के पहले ही रास्ते में जन्म लेने के लिए लाचार और मजबूर हो जाया करते हैं ।
उक्त संवेदनशील सार्वजनिक समस्याओं को लेकर तेजी से बढ़ते जन विक्षोभ,आक्रोश व दबाव के चलते प्रशासन को स्वयं ही संज्ञान लेना पड़ा। इस सम्बन्ध में बीडीओ संजीव झा ने बताया कि पुलिया बहने की जानकारी मिलते ही उन्होंने ने स्वतंत्र संज्ञान लिया है। उन्हें पूर्व की संस्तुति की सही पूरी जानकारी नहीं थी। फिर भी आम आदमी की तकलीफों और परेशानियों के मद्देनजर सुबह से संबंधित पक्षों को रास्ता को जल्द ही आवागमन योग्य बनाने का निर्देश दे दिया है। वहीं पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार ने तो माना कि छोटे ह्यूम पाइप की जगह यहां अब बढ़ते जनसंख्या की दृष्टिकोण से बड़े पुल की सख्त जरूरत है ,ताकि पानी का डिस्चार्ज ठीक ढंग से हो सके। उन्होंने आम आवाम को आश्वस्त किया है कि उक्त संवेदनशील समस्या का संज्ञान लिया गया है और अगले मात्र दो दिनों के भीतर उक्त अवरुद्ध रास्ते को बहाल करने के लिए ठोस एवं सही सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। कड़वी सच कहावत बखूबी चरितार्थ होती दिखाई पड़ रही है कि *जनता हैं त्रस्त व पुलिस प्रशासन मदमस्त।


