दतिया और बाँकीपुर का चुनाव परिणाम भारत की राजनीति में सत्ता परिवर्तन का मिल का पत्थर सावित होगा

सुनील कुमार सिंह खबर सुप्रभात सामाचार सेवा

भाजपा के सबसे मजबूत और अभेद्य गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में पार्टी की ऐतिहासिक हार केवल एक पारंपरिक सीट का खिसकना नहीं है, बल्कि सवर्णों द्वारा सत्ता के अहंकार को दिया गया एक कड़ा जवाब है। नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और उनके बेटे नितिन नवीन का करीब 30

वर्षों का एकाधिकार टूट जाना यह साबित करता है कि जब बात सवर्णों के हक और सम्मान की आती है, तो वे किसी भी दल की बंधुआ विरासत को पलटने में संकोच नहीं करते। पिछले काफी समय से यूजीसी विवाद, भर्ती प्रक्रियाओं में अनदेखी, और सबसे बढ़कर भाजपा का आरक्षण के प्रति लगातार बढ़ता झुकाव तथा प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण लागू करने की सिफारिशों ने सवर्ण समाज की नाराजगी को चरम पर पहुंचा दिया है, जो इस हार का एक बहुत बड़ा कारण बनी। अपनी योग्यता के दम पर आगे बढ़ने वाले सामान्य वर्ग को अब निजी क्षेत्रों में भी अपने भविष्य पर खतरा मंडराता दिख रहा है, जिससे युवाओं और बुद्धिजीवियों के बीच सुलग रहा आक्रोश अब चुनावी चोट के रूप में सामने आ गया है। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर भी भाजपा की पराजय इसी सवर्ण असंतोष की राष्ट्रव्यापी गूंज को दर्शाती है, जहाँ सामान्य वर्ग ने खुद को हाशिए पर धकेले जाने और हर क्षेत्र में आरक्षण के विस्तार की राजनीति के खिलाफ एकजुट होकर मतदान किया। दतिया में नरोत्तम मिश्रा का रोना और उनकी लाचारी भी भाजपा की इस करारी हार का एक मुख्य कारण बनी, क्योंकि सवर्ण समाज ने उनके इस रुदन को सिर्फ एक नेता की बेबसी नहीं बल्कि पूरे सवर्ण नेतृत्व को कमजोर करने की राजनीतिक साजिश के रूप में देखा, जिससे समाज के भीतर का गुस्सा और भड़क गया। सोशल मीडिया से लेकर धरातल तक सवर्णों के हितों को लगातार नजरअंदाज करने और प्राइवेट नौकरियों में भी उनकी घेराबंदी करने का जो माहौल बनाया जा रहा था, उसका परिणाम आज भाजपा को अपने सबसे सुरक्षित किलों को गंवाकर भुगतना पड़ा है। इसे केवल एक स्थानीय चुनाव का परिणाम मानकर खारिज करना सत्ता पक्ष की बहुत बड़ी भूल होगी क्योंकि सवर्णों का एक बड़ा और प्रभावशाली धड़ा अब यह साफ कर चुका है कि यदि उनके हक और योग्यता का सम्मान नहीं मिला, तो वे आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी अपने वोट की ताकत से बड़े-बड़े राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त करने का माद्दा रखते हैं।