नवादा से डीके अकेला की रिपोर्ट
नवादा जिले के अंतर्गत सामाजिक व आर्थिक रूप में पिछड़ेपन के गंभीर रूप से शिकार कौआकोल प्रखंड क्षेत्र में पर्याप्त वारिस नहीं होने के चलते धान की रोपनी कार्य बुरी तरह से ही प्रभावित हो गया है। सरकारी आकड़े के अनुसार अबतक मात्र जिले में 34%खेतों में ही धान की रोपनी हो सकी है। यह सरकारी आंकड़ों में सिर्फ कागजी फाइलों में सिमट कर दम तोड़ दी हैं।वास्तविकता तो हक़ीक़त से कोसों दूर है। सरकारी आकड़े चाहे जो भी दिखाया जा रहा है, हालांकि धरातल पर सच कुछ और ही बयां कर रही है। सच्चाई से अगर धान रोपनी को आंका जाए तो मात्र 10 से 15% खेतों में ही धान की रोपनी अभीतक हो सकी है। करीब आधे सावन माह बीत जाने के बाद भी वारिस के अभाव में खेत सूखे पड़े हैं,जिससे खासकर किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। प्रकृति के बेरुखी के चलते काफी संख्या में लोग अब खेती छोड़ रोजगार की खोज में धड़ल्ले से मजबूरी में पलायन करना शुरू कर दिया है। कौआकोल प्रखंड के बिंदी चक, लोहसिंघानी, बरौन, वाजिदपुर, चोंगवा,वारा समेत नावाडीह एवं पांडेय गंगौट आदि पंचायतों के साथ अन्य गांवों के किसान अभी वारिस का इंतजार कर रहे हैं। इन गांवों में रोपनी का प्रतिशत 0से 2-3%तक ही धान की रोपनी हो सकी है। अधिकांश किसानों ने धान की बिचड़ा तो तैयार कर लिया है, लेकिन खेतों में प्रयाप्त पानी नहीं रहने के कारण अभीतक रोपनी भी शुरू नहीं हो पा रही है। कई स्थानों पर तो धान का बिचड़ा सुखने भी लगा है, जिसे बचाने में किसान काफी जद्दोजहद कर रहे हैं। किसानों के साथ ही बटाईदारों ने महाजनों से सूद पर कर्ज लेकर की गई थी खेती की तैयारी की शुरुआत।
बताते चलें कि लोहसिंहानी गांव के किसान मिश्री प्रसाद निराला,इंद्रदेव मांझी, बिंदीचक गांव के कामेश्वर सिंह, बरौन के नवीन सिंह,अनिल सिंह,चितरंजन सिंह,चोंगवा के राजबलभ पासवान, कोल्हुआर के पिंटू कुमार, द्वारिका सिंह, बारा के अनिरुद्ध सिंह,वाजिदपुर के गुप्तेश्वर सिंह,अजय कुमार, नावाडीह के अशोक समदर्शी, मनोहर पासवान,अयोध्या पासवान,साकेत बिहारी , उमेश यादव,पांडेय गंगौट के जनार्दन सिंह,राम नरेश सिंह , अंजनी कुमार, उपेंद्र ठाकुर समेत क्षेत्र के दर्जनों किसानों ने बताया कि वारिस पर्याप्त नहीं होने के कारण धान का बिचड़ा अब खराब होने लगा है। उन्होंने कहा कि महाजन से कर्ज़ लेकर धान का बिचड़ा तैयार किया और भाड़े पर के ट्रैक्टर से खेत की जुटाई कराई है। अच्छी वारिस की उम्मीद में खेती की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन समय पर वर्षा नहीं होने से उनकी संजोए उम्मीदों पर पानी फिरता सिर्फ नजर आ रहा है। अब खेती में लगी पूंजी डूबने का भयंकर डर व दहशत बहुत सताने लगा है। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वारिस नहीं,तो धान की रोपनी और अधिक प्रभावित होगी तथा उत्पादन पर इसका गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।वारिस नहीं होने की वजह से आज पूरे किसानों की निगाहें सिर्फ आसमान पर टिकी हुई है।किसान अच्छी वर्षा की उम्मीद लगाए बैठे हैं ताकि धान रोपनी का काम समय पर पूरा हो सके और खरीफ की मुख्य फसल को नुकसान से बचाया जा सके।

