अम्बुज कुमार खबर सुप्रभात समाचार सेवा
ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति तक न्याय एवं निःशुल्क विधिक सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद द्वारा प्रत्येक पंचायत में विधिक सेवा केन्द्र (Legal Services Centre) स्थापित किए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल प्रारंभ कर दी गई है। इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद की सचिव श्रीमती तान्या पटेल की अध्यक्षता में

जिला पंचायती राज पदाधिकारी श्री एम. इफ्तिखार अहमद तथा जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सुश्री स्वेता प्रियदर्शिनी के साथ एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में पंचायतों के चयन, विधिक सेवा केन्द्रों की स्थापना, उनके संचालन, आधारभूत संरचना, विभागीय समन्वय एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सचिव श्रीमती तान्या पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA), पटना के निर्देशानुसार पंचायत स्तर तक विधिक सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक, सामाजिक अथवा भौगोलिक कारणों से कोई भी नागरिक न्याय प्राप्त करने से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर स्थापित होने वाले विधिक सेवा केन्द्र न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ ग्रामीण जनता और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करेंगे। बैठक के दौरान पंचायतों के चयन की प्रक्रिया पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। पंचायत भवनों की उपलब्धता, आधारभूत सुविधाओं, स्थानीय आवश्यकताओं एवं प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा करते हुए यह निर्णय लिया गया कि पंचायतवार चरणबद्ध तरीके से विधिक सेवा केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। संबंधित विभागों को आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया, ताकि चयनित पंचायतों में केन्द्रों का संचालन शीघ्र प्रारंभ किया जा सके। सचिव श्रीमती तान्या पटेल ने बताया कि इन विधिक सेवा केन्द्रों के माध्यम से ग्रामीण नागरिकों को निःशुल्क विधिक परामर्श, निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, प्री-लिटिगेशन मामलों का समाधान, मध्यस्थता, पीड़ित प्रतिकर योजना, महिला एवं बाल अधिकार, घरेलू हिंसा, बाल विवाह निषेध, दहेज प्रतिषेध, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, श्रमिकों के अधिकार, दिव्यांगजन अधिकार, उपभोक्ता अधिकार, साइबर अपराध से बचाव, मोटर दुर्घटना दावा, बैंक ऋण संबंधी विवाद, पारिवारिक विवाद, भूमि एवं राजस्व संबंधी मामलों तथा विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी एवं आवश्यक सहायता स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जाएगी। . Offउन्होंने कहा कि इन केन्द्रों के माध्यम से पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने, विधिक सहायता आवेदन तैयार कराने, आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में मार्गदर्शन देने तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से समन्वय स्थापित करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इससे ग्रामीण नागरिकों को छोटी-छोटी विधिक समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय आने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी। बैठक में जिला पंचायती राज पदाधिकारी श्री एम. इफ्तिखार अहमद ने पंचायत स्तर पर विधिक सेवा केन्द्रों की स्थापना हेतु पंचायत भवनों एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने तथा पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग से इस योजना को सफल बनाने का आश्वासन दिया। वहीं जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सुश्री स्वेता प्रियदर्शिनी ने विधिक सेवा केन्द्रों एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाने तथा प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया के माध्यम से अधिकाधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने में पूर्ण सहयोग देने की बात कही। सचिव श्रीमती तान्या पटेल ने बताया कि विधिक सेवा केन्द्रों के प्रभावी संचालन हेतु शीघ्र ही पारा विधिक स्वयंसेवकों (Para Legal Volunteers-PLVs) एवं पैनल अधिवक्ताओं की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। प्रतिनियुक्ति के उपरांत प्रत्येक केन्द्र पर निर्धारित तिथियों में पैनल अधिवक्ता एवं पारा विधिक स्वयंसेवक उपस्थित रहकर आम नागरिकों को निःशुल्क विधिक परामर्श एवं आवश्यक सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि पारा विधिक स्वयंसेवक ग्रामीण क्षेत्रों में विधिक जागरूकता अभियान चलाएंगे, पात्र लाभार्थियों की पहचान करेंगे तथा महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, श्रमिकों एवं अन्य कमजोर वर्गों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वहीं पैनल अधिवक्ता विधिक परामर्श प्रदान करने के साथ-साथ पात्र व्यक्तियों को न्यायालयीन सहायता, प्री-लिटिगेशन मामलों के समाधान, मध्यस्थता एवं लोक अदालत के माध्यम से विवादों के सौहार्दपूर्ण निस्तारण में सहयोग करेंगे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रत्येक पंचायत में समय-समय पर विधिक जागरूकता शिविर, विधिक साक्षरता कार्यक्रम, महिला एवं बाल अधिकार जागरूकता अभियान, साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम, नशा मुक्ति अभियान, पर्यावरण संरक्षण, उपभोक्ता अधिकार, वरिष्ठ नागरिक अधिकार तथा अन्य महत्वपूर्ण विधिक विषयों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में पंचायत प्रतिनिधियों, जीविका समूहों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा, ताकि विधिक जागरूकता का व्यापक प्रसार हो सके। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने इस योजना को ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पहल बताते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। अंत में सचिव श्रीमती तान्या पटेल ने कहा कि पंचायत स्तर पर विधिक सेवा केन्द्रों की स्थापना से आम नागरिकों को न्याय उनके द्वार तक उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी। यह पहल विशेष रूप से गरीब, असहाय, महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों एवं समाज के कमजोर वर्गों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। उन्होंने सभी विभागों, पंचायत प्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों से इस जनहितकारी अभियान में सक्रिय सहयोग करने की अपील की, ताकि “सबके लिए न्याय” (Access to Justice for All) के लक्ष्य को साकार किया जा सके।
