नवादा से डीके अकेला की रिपोर्ट
वैसे तो देश के विभिन्न क्षेत्रों व राज्यों एवं जिले के अंतर्गत पुलिस कस्टडी में हत्या की मामला आजादी की लड़ाई से ही पर्व सरकार प्रायोजित कृत्रिम क्रूर सुनियोजित योजना है। पुलिस अभिरक्षा में हत्या की यह कोई अकेली अनहोनी घटना नहीं है। इसी कड़ी से जुड़ा एक अति गंभीर संवेदनशील मामले को लेकर मंडल कारा नवादा में लंबे अरसों से बंदी धनश्याम कुमार उर्फ दुलोचंद की आत्महत्या के मामले में बिहार सरकार ने जवाबदेही तय करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जेल तथा सुधार सेवाएं निरीक्षालय, बिहार की ओर से जारी आदेश के आलोक के मुताबिक घटना में कथित घोर लापरवाही एवं कर्तव्यहीनता के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए निलंबित किए गए दोनों कार्यरत तत्कालीन मंडल जेल के उच्च कक्षपाल व कक्षपाल के विरोध में अब सीधे तौर पर विधिवत विभागीय सख्त ही कानूनी कारवाई शुरू करने का आदेश जारी कर दिया गया है। सरकार की ओर से जारी आदेश में उल्लेख है कि 22 जुलाई 2026 को मंडल कारा नवादा में दुष्कर्म कांड के बंदी धनश्याम कुमार उर्फ दुलोचंद ने वार्ड नंबर 14 से ही 17 की सीढ़ी पर ग्रिल में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी। इस घटित घटिया घटना के उपरांत प्रथम दृष्टया ड्यूटी में बरती गई लापरवाही तथा कर्तव्य निर्वहन में भारी गंभीर शिथिलता के आधार पर ही तत्कालीन उच्च कक्षपाल दीपक कुमार एवं कक्षपाल नितेश कुमार शर्मा को तुरंत ही तत्काल प्रभाव से उसे तुरंत ही निलंबित कर दिया गया था। निलंबन अवधि में दोनों का मुख्यालय क्रमशः उपकारा शेरघाटी और उपकारा दाऊद नगर निर्धारित किया गया है। अब कारा और सुधार सेवाएं निरीक्षालय ने निलंबन आदेश की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि बिहार सरकारी सेवक ( वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील ) के घोषित एवं तयशुदा सरकारी नियमावली 2025 के तहत दोनों कर्मियों के विरुद्ध सख्त नियमित विभागीय कार्यवाही संचालित की जाए। साथ ही साथ निलंबन अवधि के दौरान सरकार प्रदत नियमानुसार ही जीवन- यापन भत्ता स्वीकृत करने का भी आदेश दिया गया है। उक्त आदेश में मंडल कारा नवादा के जेल अधीक्षक को निर्देशित किया गया है कि जेल के दोनों निलंबित कर्मियों के खिलाफ शीघ्र ही आरोप पत्र गठित कर विभाग को जल्द ही उपलब्ध कराया जाए,ताकि निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप सार्थक करवाई के लिए अंतिम सकारात्मक रूप दिया जा सके। कारा तथा सुधार सेवाएं निरीक्षालय की यह करवाई एक स्पष्ट संदेश व संकेत देती है कि जेल प्रशासन के कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही अथवा सुरक्षा मानकों व व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोताही शिथिलता,लापरवाही और कर्तव्यहीनता को सरकार अब बर्दाश्त करने की स्थिति में कदापि नहीं है, बल्कि इसे तो बड़ी ही गंभीरता से ले रही है। बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल ही माना जा रहा है।जेल में बंद विचाराधीन और सजाबार जेल के कैदियों ने बताया कि पुलिस अभिरक्षा में हत्या की यह कोई नई बात नहीं है। यह सिर्फ नवादा के जेल की मौजूदा हालात नहीं , बल्कि बिहार की जेलों में आए दिन इस तरह के जघन्य अमानुषिक अमानवीय क्रूर कुकृत्य का प्रदूषित अन्याय की यह अंतहीन सिलसिला बेरोकटोक लगातार धाराप्रवाह जारी है।
