अम्बुज कुमार खबर सुप्रभात सामाचार सेवा
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA), पटना के निर्देशानुसार दिनांक 12 सितम्बर, 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की सफल तैयारी एवं अधिकाधिक मामलों के सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, औरंगाबाद के तत्वावधान में जिले के सभी थाना प्रभारियों (SHO) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता *प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती आनंदिता सिंह ने की। बैठक में मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी (CJM) श्री लाल बिहारी पासवान, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमति तान्या पटेल तथा जिले के सभी थाना प्रभारी उपस्थित रहे। बैठक को संबोधित करते हुए प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती आनंदिता सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत त्वरित, सुलभ एवं कम खर्च में न्याय प्रदान करने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि थाना स्तर पर पुलिस पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता की कुंजी है। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने थाना क्षेत्र में सुलह योग्य मामलों की पहचान कर कम-से-कम 20 मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत हेतु चिन्हित कर संबंधित न्यायालय को भेजना सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिया कि थाना स्तर पर पक्षकारों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क स्थापित किया जाए, उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत के लाभों की जानकारी दी जाए तथा आपसी संवाद एवं समझाइश के माध्यम से अधिकाधिक मामलों में सहमति बनाकर उनका निस्तारण कराने का प्रयास किया जाए। विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया जाए कि न्यायालय से निर्गत नोटिसों का समयानुसार एवं प्रभावी तामिला हो, ताकि कोई भी पक्षकार सूचना के अभाव में राष्ट्रीय लोक अदालत में उपस्थित होने से वंचित न रहे।
मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी श्री लाल बिहारी पासवान ने कहा कि आपसी समझौते से विवादों का समाधान होने पर न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होता है, समय एवं धन की बचत होती है तथा समाज में भाईचारा, शांति एवं सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों से अपील की कि वे सुलह योग्य मामलों में पक्षकारों को समझाकर राष्ट्रीय लोक अदालत में भाग लेने के लिए प्रेरित करें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक थाना अपने क्षेत्र के सुलह योग्य मामलों की सूची तैयार करे, पक्षकारों से नियमित संपर्क बनाए रखे तथा राष्ट्रीय लोक अदालत के पूर्व अधिक से अधिक मामलों में सहमति स्थापित कराने का प्रयास करे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मामले में थाना स्तर पर पक्षकारों के बीच सहमति बनाना कठिन प्रतीत हो अथवा प्रभावी मध्यस्थता (Mediation) की आवश्यकता महसूस हो, तो ऐसे मामलों को बिना विलंब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, औरंगाबाद को भेजा जाए, ताकि प्रशिक्षित मध्यस्थों के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान कराया जा सके। बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत से संबंधित नोटिसों का समयबद्ध तामिला सुनिश्चित किया जाए, तामिला प्रतिवेदन समय पर संबंधित न्यायालय को उपलब्ध कराया जाए तथा न्यायालय, थाना एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखा जाए। आवश्यकता पड़ने पर प्री-लिटिगेशन मामलों को भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को संदर्भित किया जाए, ताकि राष्ट्रीय लोक अदालत से पूर्व ही विवादों का सुलह-समझौते के आधार पर समाधान कराया जा सके। बैठक में यह भी कहा गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत केवल मामलों के निस्तारण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में आपसी विश्वास, सौहार्द, भाईचारा एवं न्याय तक सरल पहुँच सुनिश्चित करने का एक सशक्त अभियान है। इसलिए सभी थाना प्रभारियों से अपेक्षा की गई कि वे इस जनहितकारी अभियान में पूरी सक्रियता एवं संवेदनशीलता के साथ अपनी भूमिका निभाएँ। बैठक के अंत में सभी थाना प्रभारियों ने राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता हेतु पूर्ण सहयोग देने, अधिकाधिक सुलह योग्य मामलों को चिन्हित करने, नोटिसों का समय पर तामिला सुनिश्चित करने, पक्षकारों के बीच सहमति स्थापित कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर मामलों को मध्यस्थता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने का आश्वासन दिया।

