मॉब लिन्चिंग में मृतक 2 दलित युवक के परिजन न्याय के लिए दर- दर की ठोकरें खा रहे हैं

नवादा से डीके अकेला की रिपोर्ट


राजगीर में मलमास मेले में पुलिस प्रशासन के सह व संरक्षण में साधुओं के भेष में छिपे अपराधियों और उसके पालतू गुर्गे व गुंडों द्वारा मॉब लिन्चिंग में दो निर्दोष दलित मासूमों की हत्या दी गई।राजगीर के मलमास मेला क्षेत्र में झुनकिया बाबा मंदिर के पास श्री पिंटू पासवान एवं श्री श्रवण पासवान जी की निर्मम हत्या को काफी समय बीत चुका है, मगर

अबतक एक भी क़ातिल को न पुलिस पकड़ पाई है। हालांकि पीड़ित परिवार आज भी इंसाफ की प्रतीक्षा में दर-दर ठोकर खाने को रातदिन भटक रहा है। यह इस बात की पक्का पुख्ता प्रत्यक्ष प्रमाण है कि दोनों दलित मासूमों युवकों की निर्मम हत्या मंदिर परिसर के इर्दगिर्द हुई है। इस हत्या कांड से संबंधित दो प्राथमिकी राजगीर थाना में दर्ज हुई है।एक FIR पुलिस द्वारा एवं दूसरी FIR मृतक के परिवार द्वारा दर्ज किया गया है। ताजुब तो इस बात की है कि अबतक ऐसी जघन्य दोहरे हत्या कांड में एक भी नामजद कातिल गिरफ्तार नहीं किया गया है, यह कितनी हास्यास्पद है। क्या यह हत्यारे और पुलिस गठजोड़ की ओर साफ़ इशारा नहीं तो क्या है ? राजगीर मलमास मेला में घटना स्थल झुनकीया बाबा के मंदिर में पुलिस का डेप्युटेशन था,हजारों लोग वहां मौजूद थे, तो फ़िर चोरी कैसे हुई ? अगर वास्तव में मृतक दलित मासूम युवकों द्वारा चोरी किया गया होता तो चोरी किए गए रुपए या मोबाईल कुछ बरामद नहीं हुआ फिर अगर उसने कुछ रुपए व मोबाइल की चोरी की,तो किसी को पीट- पीट कर हत्या कर देने का आपको कौन सा तय क़ानूनी विधि सम्मत संवैधानिक हक व अधिकार है ? यह घोर मनुवादी ब्राह्मणवादी सामंती व्यवस्था का पुष्ट प्रतीक है। अंततोगत्वा अगर यह कहा जाये कि राजगीर के झुनकीया बाबा मंदिर में दलित दो निर्दोष युवकों की नृशंस पीट पीट कर हत्या सामंत,पुलिस एवं गुंडा गठजोड़ का कुपरिणाम है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति एवं शंका शुभा तनिको नहीं है।
आख़िर दोषियों की गिरफ्तारी, मुकदमे की प्रगति और सज़ा की दिशा में ठोस कार्रवाई कब तक होगी। त्वरित कानूनी कारवाई में कौन सी अड़चनें हैं व देरी क्यों हो रही है ? पीड़ित परिवार को कब तक सरकार प्रदत उचित न्याय व मुआवजा मिलेगा,यह तो अभी भविष्य के गर्व में है। मुख्यमंत्री, बिहार की जनता जानना चाहती है कि ये दो मृतक मासूम दलित परिवारों को न्याय कब मिलेगा? बिहार वासी इंतजार भी करेगी और अपने रंजिश को जनघर्षों के जरिए इजहार भी करेगा। अपराधियों का एनकाउंटर कब होगा या सिर्फ़ ढोंग व बकवास ? जल्दी से जल्दी दोषियों के खिलाफ़ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई हो, ताकि कानून का राज स्थापित हो और पीड़ित परिवारों का देश की कानून व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।
बगावत का असली है जड़
“इंसाफ में देरी, इंसाफ से इनकार के समान है।”