आंदोलन का सरकारी जबाव – लाठी-गोली चार्ज,गिरफ्तारियां और है नकली मुठभेड

डीके अकेला के कलम से


सरकार की जनविरोधी दमन कारी नीतियों,क्रिया कलापों व गैर कानूनी बदसलूकियों के खिलाफ पूरे देश -दुनिया में आज जनांदोलनों का अंतहीन सिलसिला तेज़ी से बढ़ते जा रहा है। साम्राज्यवाद परस्त और कॉर्पोरेट घरानों के विश्वसनीय चाटुकार चाकर भारतीय शासक वर्ग के पास हरेक जन

डीके अकेला

आंदोलन का सरकारी जबाव के बतौर मात्र अब लाठी – गोली चार्ज, फर्जी मुकदमा, गिरफ्तारियां और नकली मुठभेड़ ही बचा है। दिल्ली के आस पास बसे मजदूर का आंदोलन, छत्तीसगढ़ में आदिवासियों का जल,जमीन और जंगल बचाने का आंदोलन, एस आई आर के बहाने सही लाखों लाख मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के विरुद्ध संचालित आंदोलन, नीट पेपर लीक होने पर देश हो रहे छात्र आंदोलन, नीट छात्रा के साथ बलात्कार व नृशंस हत्या के खिलाफ आंदोलन अथवा अन्य दमनकारी काले कानूनों के विरुद्ध और बुनियादी मूलभूत सुविधाओं को लेकर जारी जन आंदोलन व प्रदर्शनों का जबाव केंद्र व राज्य की सरकारें उनकी न्यायोचित मांगों को मानने और उसे वार्ता के लिए आमंत्रित करके नहीं दे रही है, बल्कि उनकी गिरफ्तारी, लाठी गोली और फर्जी मुकदमा व मुठभेड़ से आज दे रही है। इन आंदोलनों के दौरान और इसके बाद अबतक कितने लोगों को पुलिस उठा चुकी है, इसका कोई कंक्रीट आंकड़ा नहीं मिल सका है। लेकिन, जिस तरह मजदूरों और किसानों के परिजनों के बयान आ रहे हैं, उसे देखकर यह निश्चित है कि अवैध तरीके से गिरफ्तार जेल भेजे गए लोगों की संख्या सैकड़ों में हैं। जल जंगल और जमीन के लिए आंदोलन कर रहे अनगिनत आदिवासियों पर झूठे मुकदमों के साथ नकली मुठभेड़ में हजारों निर्दोष मासूमों को आतंकवादी व नक्सलवादी के नाम पर हृदयहीनता से मौत के घाट उतार दिया गया है। छत्तीसगढ़ के जल, जंगल और जमीन के साथ अकूत प्राकृतिक अमूल्य संपदा को कॉर्पोरेट घरानों के हाथों हवाले करने के मूल उद्देश्यहै आदिवासियों को विस्थापित करने हेतु फर्जी मुकदमा एवं नकली मुठभेड़ का क्रूरतापूर्वक निर्लज्जता से निर्मम अंजाम दिया जा रहा है। यहां तक कि कुछ उन लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया जाता है, जिनका उस आंदोलन से कोई भी लेना -देना नहीं था। मजदूर बिगुल अखबार और जनचेतना प्रकाशक से जुड़े अनुवादक सत्यम वर्मा के लखनऊ स्थित आवास पर उतर प्रदेश पुलिस ने 17 और 18 अप्रैल दो दिन गहन छानबीन की। थाने पर बैठाए रखा और 18 अप्रैल को देर रात उन्हें लेकर चले गए । एक दिन 20 अप्रैल को उन्हें सूरजपुर कोर्ट में पेशकर आंदोलन को उकसाने व अराजकता फैलाने का आरोप लगा कर जेल भेज दिया। इसी दिन आंदोलन के मास्टर माइंड बताकर मजदूर बिगुल के ही आदित्य आनंद को तमिलनाडु से गिरफ्तार कर सूरजपुर कोर्ट लाया गया। संविधान एवं कानून को ताक पर रख, तमिलनाडु की कोर्ट से बिना ट्रांजिट रिमांड लिए, उन्हें उत्तर प्रदेश लाया गया। एक अखबार ने अपनी रिपोर्टिंग में कहा कि आदित्य ने इंकलाब जिंदाबाद के नारे लिखे और * जाम करो शोषण का पहिया -मालिकों से लड़ने एक हो जा भइया * का नारा लगाया और सोशल मीडिया पर लिखा। गोदी अखबारों के अलावा गोदी चैनल भी इसी तरह की बेवकूफी भरी भाषा में आदित्य के बारे में खूब चीखने- चिल्लाने लगे हैं। इन दोनों के पहले 11 अप्रैल की शाम सादी वर्दी में पुलिस वालों दिल्ली में मेट्रो पकड़ने जा रहे रूपेश राय, मनीषा, आकृति और सृष्टि को गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा उन्होंने ने 11 अप्रैल को ही बेल्सोनिक यूनियन के महासचिव अजीत को, इंकलाबी मजदूर केंद्र श्यामवीर और हरीश को, बेल्सोनिक यूनियन के पदाधिकारी पिंटू को और छात्र हिमांशु ठाकुर को भी गिरफ्तार कर लिया ऐसा अनुमान है कि मजदूरों और किसानों के अलावा ऐसे कई निर्दोष अनगिनत मासूम लोग गिरफ्तारी की भेंट कितने बेकसूर मासूम चढ़ते ही अभी रहेंगे,कहना मुश्किल है। कुछ दिनों पूर्व खबर सुप्रभात सोशल मीडिया चैनल व यूट्यूब के निदेशक व संपादक आलोक कुमार की बेबाक टिप्पणी ,समाचार व आलेख की अभिव्यक्ति के कसूर में एक पूर्व में दर्ज़ फर्जी मुकदमा के बहाने पुलिस ने उनके घर को पुलिस छावनी में तब्दील कर गिरफ्तार कर जेल की यातनाओं का शिकार बनाया गया। इतना ही नहीं पुलिस द्वारा आलोक को गिरफ्तार करने के बाद घर पर लगे सीसीटीवी कैमरा का डीपीआर भी इस लिए खोल कर लेते इस लिए लेते गई कि सभी तरह के साक्ष्य को छुपाया जाए।इस प्रकार के अनगिनत उदाहरण भरे पड़े हैं, जो जगजाहिर है।