औरंगाबाद खबर सुप्रभात समाचार सेवा
औरंगाबाद जिले में चहुंओर भ्रष्टाचार जड जमा चुकी है। जिले के कोई ऐसा विभाग नहीं जहां भ्रष्टाचार का दरिया नहीं ब बह रहा है। जिला सर्टिफिकेट कार्यालय व जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय तथा बाल विकास परियोजना कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है वहीं पंचायतों में

चल रहे विकास कार्य भी भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ कर दम तोड रहा है। बालविकास परियोजना पदाधिकारी के कार्यालय नबीनगर में फर्जी पहचान और प्रमाण पत्र पर नौकरी करने, फर्जी प्रमाण पत्र पर नियोजित शिक्षिका का फर्ज़ी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी को आगाह करने, पंचायतों में ग्रामीणों के फर्जी हस्ताक्षर पर ग्राम सभा आयोजित करने के सूचना के बावजूद यदि जांचोपरांत कारवाई नहीं करना यह जाहिर होता है कि जिला प्रशासन के अधिकांश वरीय अधिकारी भी या तो भ्रष्टाचार के बह रहे दरिया में गोता लगा रहे हैं या फिर भ्रष्टाचार के संरक्षक थे रहे हैं। आश्चर्य तो यह है कि छात्रवृत्ति मद्द की राशि को घपला घोटाला आर्थिक अपराध इकाई द्वारा सामने लाने के बाद जिला कल्याण पदाधिकारी के कार्यालय से घोटाला की गई राशि को रिकवरी नहीं करने के बाद जिला सार्टिफिकेट केस के बावजूद भी किसी तरह का कारवाई वर्षों तक प्रकाश में नहीं आया है। इतना ही नहीं सूचना अधिकार कानून के तहत समय पर जिले के जिम्मेवार अधिकारियों द्वारा सूचना नहीं देना भी यह दर्शाता है कि अधिकारियों द्वारा भी भ्रष्टाचार उजागर नहीं बल्कि उसपर पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है।

