नवादा से डीके अकेला की रिपोर्ट
नवादा जिले के अंतर्गत पर्यटक मानचित्र पर शीघ्र ही सार्थक बहुत बड़ा बदलाव जिलेवासियों को देखने का सौभाग्य मिल ही सकता है। जिले के चार प्रमुख जलाशयों के साथ ही साथ प्राकृतिक सौंदर्य के मुख्य दृष्टिकोण से सुप्रसिद्ध ककोलत जलप्रपात को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल के ही तहत ईको टूरिज्म का विशाल हब के रूप में विकसित करने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। बिहार राज्य ईको टूरिज्म डेवलपमेंट सोसाइटी (BETDS) की देखरेख में इन बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं को विकसित किया जाएगा। नवादा में ईको टूरिज्म को मिली उड़ान से पर्यटन को गति देने के लिए युद्धस्तर पर काम तेज करना प्राथमिकता है। ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने का मूल उद्देश्य एवं मकसद प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण करने के साथ ही पर्यटकों को विश्वस्तरीय सभी सुविधाओं को उपलब्ध कराने और स्थानीय बेरोजगारों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करता है। ककोलत जल प्रपात का हाल ही में तो (BETDS) द्वारा चयन कर लिया गया है। इससे पूर्व वन विभाग के अनुशंसा पर जिले के 04 जलाशयों का चयन ईको टूरिज्म परियोजना के लिए किया गया था।
ज्ञात हो कि इनमें जिले के अंतर्गत रजौली अनुमंडल के जॉब जलाशय, फुलवरिया जलाशय, कौआकोल प्रखंड का तारकोल डैम व गोविंदपुर का कोल महादेव डैम शामिल हैं। वन विभाग द्वारा जिले के जलाशयों को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। विभाग के कंसल्टेंट कपूर एंड संस ने हाल ही में वन विभाग के वन प्रमंडल पदाधिकारी के साथ रजौली के फुलवरिया डैम तथा गोविंदपुर के कोल महादेव डैम का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण भी किया गया है।
फुलवरिया और कोल महादेव डैम में वाटर स्पोर्ट्स,बोरिंग,होटल एवं कैफेटेरिया की समुचित व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए बिहार ईको टूरिज्म डेवलपमेंट सोसाइटी ने व्यवहारिक अभियान तेज करने की ज़मीनी तैयारी शुरू कर दी है।वन विभाग के कंसल्टेंट ने पुरी कर ली स्थलीय निरीक्षण।
वेंडिंग जोन को मिला नया स्वरूप। ककोलत के वेंडिंग जोन में दुकानदारों के लिए 60आधुनिक शेड बनाए गए हैं।मेटल पफ तकनीक से बने इन शेडों में गर्मी का प्रभाव कम पड़ेगा। पहले अस्थाई पंडालों से अव्यवस्था सदैव उत्पन्न रहती थीं। अब स्थाई शेड बन जाने से पर्यटकों को सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र की सुंदरता व व्यवस्था में बहुत ही सुधार होगा।
- पब्लिक – प्राइवेट – पार्टनरशिप * (पीपीपी) मॉडल से जिले के स्वर्ग व देश के दूसरा कश्मीर कहलाने वाले ककोलत का अब द्रुत गति से विकास होगा। हाल ही में ककोलत का चयन किया गया है।इसके अलावा दो अन्य जलाशयों रजौली के फुलवरिया डैम और गोबिंदपुर के कोल महादेव डैम का भी हाल ही में वन विभाग के कंसल्टेंट द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया जा चुका है। वन प्रमंडल पदाधिकारी श्रेष्ठ कुमार कृष्णा ने बताया कि प्रिलिमनरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट (पीपीआर) सरकार को दिया जाएगा। इसके बाद इन्वेसर्ट्स मिट कर उनकी सहमति के ही अनुरूप फाइनल डीपीआर तैयार किया जाएगा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार व बाजार। पर्यटक विशेषज्ञों के मुताबिक परियोजनाओं को पूरा होने से नवादा में पर्यटन गतिविधियां गुणात्मक बढ़ेगी। होटल,हस्त शिल्प,परिवहन और खाद्य व्यवसाय को अत्यधिक ही बढ़ावा मिलेगा। रोजगार के अनेकों नए सुअवसर पैदा होंगे। ईको टूरिज्म के लिए चयनित चार जलाशयों के विकास से नवादा भावी दिनों में बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थल व केंद्रों में शामिल हो सकता है।
बताते चलें कि ककोलत में ड्रेनेज सिस्टम,कैनाल और सुरक्षा दीवार बनकर तैयार। कालकोल में पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण आधारभूत विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं।वारिस की पानी की निकासी हेतु आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, कैनाल और सुरक्षा दीवार निर्माण कराया गया है।
पहले भारी बारिश के दौरान जलभराव होने से पर्यटकों की आवाजाही में लगा काफ़ी प्रभावित होना पड़ता था और कई बार ककोलत को अस्थाई रूप से बंद भी कर देना पड़ता था। नई व्यवस्था के बाद वर्षा का पानी बड़ी तेजी से बाहर निकल रहा है। जलजमाव की समस्या अब यहां तकरीबन समाप्त हो चुकी है। मुख्य जलकुंड का भी जीर्णोद्धार कराया गया है।करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए की लागत से कुंड का सौंदर्यीकरण के साथ सुरक्षा कार्य कराए गए हैं। समग्र पर्यटन परियोजना के रूप में विकास करना ही प्रथमिक कार्यभार है। ककोलत जलप्रपात को पहली बार एक समग्र पर्यटन परियोजना के रूप में विकसित किया जायगा। यहां केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि एडवेंचर टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जाएगा। योजना के प्रथम चरण में जिप लाइन, जिप साइकिलिंग तथा अन्य तरह के साहसिक गतिविधियों की शुरुआत होंगी। इसके साथ ही पर्यटकों के रात्रि विश्राम के लिए आधुनिक कॉटेज बनाए जाएंगे ताकि पर्यटन एक दिन के बजाय अधिक समय तक यहां ठहर सकें। इसके लिए ककोलत नाका के बाहर उपयुक्त भूमि चिन्हित कर ली गई हैं।
