आइएस अधिकारी अभिलाषा शर्मा के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का मामला सरकार के पास लम्बित,किमती आईफोन व अन्य गिफ्ट समाग्री मिलता था, विदेशों का टुर कराने से लेकर बगवानी भी किया गया था, इडी जांच से हुआ खुलासा


केन्द्रीय न्यूज डेस्क ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा


बिहार सरकार द्वारा बार-बार यह दावा किया जाता है कि भ्रष्टाचार मामले में सरकार 0टारलेंस के नीति पर काम कर रही है। लेकिन जानकारी के अनुसार 2O14बैच के अधिकारी व औरंगाबाद के वर्तमान जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा उनके पति व 2017 बैच के आइएएस अधिकारी युगेश कुमार सागर के विरुद्ध प्रदर्शन निदेशालय (E D) के द्वारा टेंडर घोटाला व विदेश यात्रा मामले में बिहार सरकार से

आइएएस अधिकारी व औरंगाबाद के जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा

नवम्बर 2025 के अंतिम सप्ताह में प्राथमिक दर्ज करने का अनुमति मांगा है। लेकिन अभी तक न तो अनुमति मिली है और नहीं अनुमति को खारीज किया गया है। लगभग 6माह से लम्बित रखने का आखिर बिहार सरकार के पास औचित्य क्या है? जानकारी के अनुसार रिशु श्री उर्फ रंजन सिन्हा टेंडर घोटाला करने के लिए आइएएस अधिकारी अभिलाषा शर्मा और उनके पति व आइएएस अधिकारी योगेश कुमार सागर को महंगे आइफोन तथा अन्य किमती गिफ्ट समाग्री उपलब्ध कराता था और विदेश यात्रा भी करवाता था। उक्त मामले का पर्दाफाश प्रवर्तन निदेशालय (E D) द्वारा मिले डिजिटल साक्ष्य के आधार पर किया है। अब सवाल यह उठता है कि जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा बिहार सरकार से दोनों आइएस अधिकारी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने हेतु अनुमति मांगने पर आखिर छः माह से लम्बित क्यों रखा गया है?यह एक यक्ष सवाल आम अवाम के बीच बना हुआ है तथा सरकार द्वारा भ्रष्टाचार मामले में O टारलेंश के दावा व नितियों पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। यदि दोनों अधिकारी दोषी नहीं हैं तो सरकार प्राथमिकी दर्ज करने वाले अनुमति को खारिज क्यों नहीं कर रही है और यदि दोनों अधिकारी दोषी हैं तो फिर अनुमति क्यों नहीं दे रही है? रिशु श्री उर्फ रिशु सिन्हा यहां तक कि आइएस अधिकारी के यहां लगभग 9-10 लाख रुपए के लागत से बागवानी भी लगवाया था। अभिलाषा शर्मा वर्तमान में औरंगाबाद के जिलाधिकारी के पद पर हैं। और जिले में चलने वाले सरकार प्रायोजित योजनाओं में मनमानी धांधली एवं भ्रष्टाचार का बोलबाला होने का चर्चा आम अवाम में हो रहा है। लेकिन जिलाधिकारी के होने वाले औचक निरीक्षण तथा समीक्षा बैठक में कोई गड़बड़ी प्रकाश में संवाद लिखे जाने तक नहीं आया है।