बछड़ा माँगा रहा है जीवन की भीख, तो कुछ लोग ले भागे माँस खानें के लिए

अम्बुज कुमार खबर सुप्रभात समाचार सेवा


मंगलवार की संध्या में मदनपुर में कुछ अजव- गजब तमाशा देखनें को मिला। एक गौ पालक का बछड़ा पेट में हुए जख्म से दर्द से कराह रहा था। गौ पालक नें बछड़े को शिवनाथ बिगहा मोड़ के समीप निजी पशु चिकित्सक से इलाज करानें हेतु लाया। पशु चिकित्सक नें दर्द से कराहते हुए बछड़े को

देखकर कहा कि इसके पेट में जख्म (अपेन्टीस ) है। तुरंत ही ऑपरेशन करना पड़ेगा। पशु पालक एवं पशु चिकित्सक की सहमती से बछड़े का पेट चिकित्सक नें फाड़ डाला । चिकित्सक नें पेट के अंदर का जख्म देखकर कहा कि यह ला – ईलाज है। ठीक नहीं होगा। बछड़े को उसी हाल में N H 2 के किनारे फेंक कर मरनें के लिए छोड़ दिया। तभी खिरियावाँ गाँव के कुछ विधर्मियों की नजर इस बछड़े पर पड़ी तो उनके मुँह से बछड़े का माँस खानें के लिए लार टपकनें लगा। आनन – फानन में दो लड़कों नें तड़पता बछड़ा को एक टेम्पु में लादकर खिरियावाँ स्थित अपने घर में काटनें – खानें के मकसद से लेकर चले गये। यह खबर पुरे क्षेत्र में जंगल की आग की तरह फैल गयी कि एक बछड़ा को काटनें के लिए खिरियावाँ गाँव में लाया गया है। इसी सूचना के आधार पर प्रखंड़ बजरंग दल प्रमुख रितिक रौशन एवं विश्व हिन्दू परिषद् के जिला सह – सचिव नवीन पाठक कुछ लोगों के साथ पहुँचकर बछड़े को अपनें कब्जे में लेकर अपनी सुरक्षा में ले आये हैं। बोतल से दुध पिलाया जा रहा है लेकिन पेट खुला हुआ है। अब सबाल उठना लाजिमी है कि जब डॉक्टर नें पेट फाड़ा तो सिलाई क्यूँ नहीं किया । अगर सिलाई नहीं करना था तो पेट फाड़ा ही क्यूँ । कौन था वह पशुपालक ? जिसनें इस हालात में बछड़े को मरनें के लिए छोड़कर फरार हो गया ? कौन थे वे विधर्मी जो खिरियावाँ गाँव में बछड़े को भक्ष्य करनें हेतु ले गये थें। क्या कहता है भारत का संविधान और मौजुदा कानून ? सवाल तो कई उठ रहे हैं लेकिन बछड़ा अभी भी जीवन और मौत से लड़ रहा है।