15 लाख खर्च, फिर भी बदइंतजामी की भेंट चढ़ा गजना महोत्सव, उद्घाटन में ढाई घंटे की देरी, वीआईपी से आम दर्शक तक पानी को तरसे

गजना धाम से खबर सुप्रभात का ग्राउंड रिपोर्ट

ऐतिहासिक गजना धाम को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के दावों के बीच सोमवार को शुरू हुआ दो दिवसीय गजना महोत्सव प्रशासनिक बदइंतजामी की भेंट चढ़ता नजर आया। करीब 15 लाख रुपये खर्च कर आयोजित महोत्सव में न तो समय प्रबंधन दिखा और न ही बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम। प्रचार-प्रसार की कमी के कारण पंडाल में अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी, वहीं उद्घाटन समारोह में शामिल अतिथि, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु घंटों भूखे-प्यासे बैठे रहे। हैरानी की बात यह रही कि वीआईपी दीर्घा तक में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं थी।


निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उद्घाटन सुबह 11 बजे होना था। इसे देखते हुए ग्रामीण और श्रद्धालु सुबह 10 बजे से ही पंडाल में पहुंचने लगे थे। लेकिन प्रशासनिक लेटलतीफी के कारण उद्घाटन दोपहर 1:30 बजे शुरू हुआ और करीब 3 बजे तक चला। इस दौरान सुबह से इंतजार कर रहे लोगों के लिए न अल्पाहार की व्यवस्था की गई और न ही पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया गया। पांच घंटे तक चले इंतजार ने आयोजन की व्यवस्थागत तैयारियों की पोल खोल दी। आम दर्शकों के साथ वीआईपी दीर्घा में बैठे लोगों को भी पानी के लिए परेशान होना पड़ा। महोत्सव में कम भीड़ को लेकर भी प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठे। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार दर्शकों की उपस्थिति काफी कम रही। स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं किए जाने के कारण आसपास के गांवों और कस्बों तक आयोजन की सूचना नहीं पहुंच सकी। पूर्व विधायक विजय कुमार सिंह उर्फ डब्ल्यू सिंह ने भी मंच से प्रचार-प्रसार के अभाव पर सवाल उठाते हुए व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। उन्होंने मंदिर परिसर में एनटीपीसी के माध्यम से डीलक्स शौचालय निर्माण की मांग भी रखी। महोत्सव का उद्घाटन एमएलसी दिलीप कुमार सिंह, विधायक ललन भुईयां, डीएम अभिलाषा शर्मा और एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। डीएम ने बताया कि पर्यटन विभाग की विकास योजनाओं का करीब 65 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए मंदिर परिसर में सहयोग शिविर लगाने की बात भी कही। दूसरी ओर, जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र की बुनियादी जरूरतों को उठाया। जिप सदस्य हरिराम ने कररबार नदी पर छोटा डैम और लिफ्ट इरिगेशन की मांग की, जबकि मुखिया टुन्ना सिंह ने हाईमास्ट लाइट, पेयजल, यात्री विश्राम गृह और बाईपास सड़क निर्माण का मुद्दा उठाया।
दिनभर की अव्यवस्थाओं और लोगों की नाराजगी के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र बना। सारेगामापा और इंडियन आइडल फेम गायिका मधुरिमा बसु की प्रस्तुति पर दर्शक झूम उठे। उनकी सुरीली आवाज ने सांस्कृतिक संध्या में जान डाल दी। कार्यक्रम में एडीएम अनुग्रह नारायण सिंह, एसडीएम गौरव सिंह, एसडीपीओ सुशील कुमार, प्रमुख चित्रा देवी सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। महोत्सव के पहले दिन की अव्यवस्थाओं ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया कि पर्यटन स्थल के विकास और बड़े आयोजनों पर लाखों रुपये खर्च करने के दावों का क्या मतलब, जब अतिथियों और श्रद्धालुओं के लिए समय पर पानी और नाश्ते जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित नहीं की जा सकें। आयोजन की सफलता केवल भव्य मंच और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से नहीं, बल्कि बेहतर प्रबंधन, व्यापक प्रचार और जनसुविधाओं से तय होती है।