चक्रवाती तुफान ‘ अर्णव ‘ की मार से औरंगाबाद जिले के किसान बुरी तरह प्रभावित, खरीफ फसलों में भारी क्षति का अनुमान

सुनील कुमार सिंह की रीपोर्ट


बंगाल की खाड़ी से उठा तुफान ‘ अर्णव ‘ भारत के कई राज्यों उड़िसा, आन्ध्रा प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, झारखणड़, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड़,छतिसगढ़, मध्य प्रदेश सहीत कुल 21 राज्यों को कमोबेश प्रभावित किया है। बंगाल की खाड़ी से उठा घुमकेतु के समान दिखनें वाला तुफान उड़िसा एवं पश्चिम बंगाल के समुद्री तट से टकराया । तेज हवाओं के साथ जोरदार बारीश शुरू हो गयी । पहाड़ी क्षेत्रों वाले राज्यों में जोरदार वर्फबारी हुई । बंगला देश नें इस चक्रवाती तुफान का नाम ‘ अर्णव ‘ दिया ।
28 अक्टुबर की शाम होते -होते अर्णव तुफान झारखण्ड़ एवं बंगाल के रास्ते बिहार में प्रवेश कर गया । तेज हवाओं के साथ – साथ रुक – रुक कर कभी तेज तो कभी हल्की बारीश होनें लगी । इस चक्रवाती तुफान ‘अर्णव ‘ नें संपूर्ण औरंगाबाद जिलें में खुब कहर बरपाया । जन – जीवन दो दिनों से मानों ठहर सा गया है। लोग अपनें घरों में दुबके पड़े हैं। जानवर खुँटा से बँधे हैं । पशु पालक परेशान हैं। बच्चों का स्कुल जाना बाधित है। किसान त्राहीमान – त्राहीमान करनें में लगे हैं। खरीफ फसलों में जल भराई हो जानें से धान, आलु, शब्जी, सरसो तथा पैरा बोये गये फसलों ( तिसी, खेसाड़ी, मटर, चना, राई ) को काफी नुकसान हुआ है। तेज पूर्वा हवाओं से जड़हन धान के फुल झड़ गये तथा पौधे खेतों में भरे पानी में गीर पड़े है । नतीजन उपज की भारी हानि उठानी पड़ेगी ।
तेज पूर्वी बैयार से कहीं तरूबर टुट कर बिजली के तार पर गीर पड़े हैं तो कहीं व्रिटीश जमानें के लगे तार – पोल टुटकर जमींदोज हो चुके हैं । नतीजन गुरुबार की रात्री से ही बिजली रानी मैके चली गयी हैं। सारी रात अंधेरे में रहनें को लोग – बाग मजबुर हो चुके हैं। पीनें के पानी को भी छछन रहे हैं।
कौन सुनेगा गरीब जनता एवं किसानों का दुःख दर्द ? क्या फसलों में हुए क्षति का आकलन कर सरकार किसानों को क्षतिपूर्ति देगी ? यह अहम एवं गंभीर सवाल उठ खड़ा हुआ है, पुछता है भारत ?