नवादा रेलवे स्टेशन पर टिकट काउंटर बंद रहने से यात्रियों को बढ़ा परेशानी,उंच स्तरीय जांच से   मनमानी का होगा खुलासा

नवादा से डीके अकेला की रिपोर्ट

नवादा नगर में स्थित पूर्व मध्य रेलवे का नवादा स्टेशन की मौजूदा हालात बेहद दयनीय एवं सोचनीय बना हुआ है। नवादा स्टेशन पर दो खिड़की आरक्षित श्रेणी और चार खिड़की अनारक्षित श्रेणी के लिए बनाया गया है। बताते चलें कि अनारक्षित श्रेणी के चार टिकट खिड़की में से एक 

दिव्यांग के लिए सुरक्षित है। लेकिन विडंबना है कि नवादा स्टेशन में अभी मात्र एक आरक्षित श्रेणी और एक ही अनारक्षित श्रेणी की टिकट खिड़की चालू है। अन्य सभी बंद है। किन क्यों बंद है  यह उच्चस्तरीय जांच से खुलासा होगा

।लेकिन इसके चलते आम रेलवे यात्रियों को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है। और खासकर सीनियर सिटीजन और दिव्यांगों को तो प्रायः टिकट ही नहीं मिल पाता है। यात्रि बिना टिकट के अवैध तरीके से सफर करने के लिए  विवश व

मजबूरहो रहे हैं। यह  विडंबना है कि एक तरफ पूर्व मध्य रेलवे द्वारा लाउड स्पीकर से  घोषणा की जाती है कि यात्रीगण बिना टिकट के यात्रा न करें , नहीं तो क़ानूनन दंड के भागीदार होंगे लेकिन दूसरी ओर अन्य सभी टिकट खिड़की बंद कर देने से टिकट लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों को मजबुर व लचार बनाया जा रहा है। टिकट नहीं मिल पाने के कारण अत्यावश्यक यात्रा से कई बंचित होकर पश्चाताप की आग में जलने के सिवा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचता है। इससे आम रेलवे यात्रियों के साथ रेलवे विभाग को राजस्व का भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। आम लोगों का यह ज्वलंत सवाल है कि जब चार टिकट खिड़की अनारक्षित श्रेणी के लोगों के लिए उपलब्ध हैं,तो फिर किस वजह या दृष्टिकोण से तीन टिकट खिड़की बंद ही रहता है,जिससे रेलवे यात्रियों को तथा रेलवे विभाग दोनों को अपार क्षति हो रहा है। एक रेलवे विभाग के कार्यरत कर्मचारी ने अपने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि अन्य टिकट की खिड़की चालू नहीं होने के पीछे स्टाफ यानी आदमी ही नहीं है तो फिर खिड़की कैसे चालू होगा ? इन्होंने ने यहां तक कहा कि अब भावी दिनों में यह भी टिकट खिड़की बंद हो जाने जा रहा है। कुछ दिनों के बाद ऑफलाइन ही टिकट कटेगा तो फिर टिकट खिड़की की जरूरत ही क्यों रहेगी ? रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव के चलते रेल यात्रियों को बेसब्री से खटक रहा है।
रेल यात्रियों की संख्या के लिहाज़ से रेलवे यात्री शेड नहीं रहने के चलते बहुत कठिनाइयों का सामना करने को लाचार हैं।रेल यात्रियों के लिए पेशाबखाना और शौचालय के घोर अभाव के कारण कृत्रिम संकट से जूझ रहे हैं। इज्ज़त आबरू तक कभी बेपर्दा हो जाया करता है।बेहद दुखद स्थिति इस मोड़ पर आ गई है कि रेलवे यात्रियों के लिए अबतक पेयजल तक की भी समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई है। राहुल – प्रियंका गांधी सेना के बिहार राज्य के सचिव संजय सिंह और नवादा जिला अध्यक्ष सह सेवानिवृत रेल कर्मचारी उमाशंकर रजक के अथक सहयोग व प्रयास से रेल यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशन के कैम्पस में पेयजल की उतम व्यवस्था की गई है, जिससे आम रेलवे यात्रियों को काफी बड़ी राहत व सुविधा उपलब्ध है। यह कितनी हास्यास्पद एवं कड़वी सच है कि तथाकथित आजादी की करीब 77 वर्ष बीत जाने के बाद इस इक्कीसवीं सदी में भी आज देश की जनता मूलभूत बुनियादी सुविधाओं से पूर्णतः बंचित हैं। आये दिन रेल यात्रियों के साथ असमाजिक तत्वों द्वारा जेबर, गहना, रूपये, मोबाइल व अन्य समानों को लूट लिया जाता है और ,यहां सुशासन, कानून की राज, सबका साथ, सबका विकास और सबका सम्मान के साथ आत्म निर्भर और विश्वगुरु का ढिंढोरा बेशर्मी से पीटा जा रहा है। अपने मुँह मियां मिठ्ठू बनकर सिर्फ रह गए हैं।नवादा वासियों और खासकर रेल यात्रियों ने रेलवे मंत्री, भारत सरकार एवं अधिकारी,नवादा के सांसद,एमएलसी सभी एमएलए व जनप्रतिधियों समेत तथाकथित डबल ईंजन की सरकार से साग्रह सादर अनुरोध किया है कि नवादा स्टेशन में यात्रियों की बुनियादी मूलभूत सुविधाओं की अविलंब गारंटी करें। सभी टिकट खिड़की को चालू करने, शौचालय और पेयजल जैसी आवश्यकता के मद्देनजर तत्काल समुचित व्यवस्था करने की मांग किया गया है। अगर समय रहते उक्त मूलभूत बुनियादी सुविधाओं की मुहैय्या नहीं कि गई तो निकट भविष्य में उग्र जन आंदोलन शांतिपूर्ण जनतांत्रिक तरीके से तेज़ होगा, जिससे इंकार कदापि नहीं किया जा सकता है,जो भावी दिनों में रेलवे विभाग तथा सरकार दोनों के लिए सिरदर्द बन जाएगा। रेलवे विभाग द्वारा पैदा की गई कृत्रिम उत्पन्न संकट के कारण रेल यात्रियों में भारी विक्षोभ व विरोध है। कहने का मूल मकसद है कि राख के नीचे आग ही आग है। यह दबी आग कब धधक उठेगा, कहना बड़ा मुश्किल है ? अगर यही हाल रहा तो कुछ – कुछ खेला तो जरूर ही होगा।