सासाराम मंडल कारा में विचाराधीन बंदी की मौत से उठ रहा जेल प्रशासन पर सवाल, औरंगाबाद मंडल कारा सहित राज्य के सभी जेलों में स्थित दैनिय


केन्द्रीय न्यूज डेस्क ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा


सासाराम मंडल कारा में विचाराधीन बंदी मिथलेश भुइयां का मौत, लगभग छः माह पूर्व औरंगाबाद में भी एक दलित विचाराधीन बंदी का हुए मौत पुरे राज्य में कारागृहों में स्थित बद से बद्तर होने का जिता जागता उदाहरण है। बताते चलें कि बंदियों को जेल में जम कर शोषण हो रहा है तथा जेल प्रशासन का भय और आतंक स्थापित हो गया है। जेल

मंडल कारा सासाराम

प्रशासन द्वारा राज्य के जेलों में व्याप्त भय और आतंक का आलम यह है कि ग़रीब और असहाय बंदियों को मुंह खोलना अथवा शोषण के विरोध करना अपने आप को असुरक्षित समझते हैं। चाटुकार बंदियों और जेल प्रशासन द्वारा जम कर पीटाई किया जाता है और पीटाई से ही मौत होता है। डाक्टर से लेकर जिला प्रशासन के साथ सांठ गांठ से ही सब-कुछ संभव हो पाता है। आश्चर्य तो यह है कि जभी कोई जांच जेल में आता है तो पहले ही जानकारी जेल प्रशासन को हो जाया करता है। औरंगाबाद मंडल कारा में लगभग छः माह पूर्व एक दलित बंदी का मौत पीटाई से ही हुआ है और यह कटु सत्य है। लेकिन जानकारी के अनुसार सब लीपापोती का खेल जांच में हो रहा है। जेल में 70-80 प्रतिशत बंदी असहाय ग़रीब और दलित समुदाय के है लेकिन उन्हें भर पेट भोजन नहीं मिल रहा है। जो भोजन परोसा भी जा रहा है वह अति घटीया किस्म का भोजन परोसा जा रहा है। बंदियों को मिलने वाले जेल मेन्युअल के अनुसार कभी भी भोजन नास्ता और चाय नहीं मिल रहा है।