सुनील कुमार सिंह खबर सुप्रभात समाचार सेवा
यूँ तो संपूर्ण मदनपुर का इलाका जंगल एवं पहाड़ो से घिरा है । नतीजन गर्मी के दिनों में अत्यधिक गर्मी एवं ठंढ़ी के दिनों में अधिक ठंढ़ यहाँ के वासियों को बरदान में मिला है। विना पेड़ो के पहाड़ जब गर्मी में गर्म हो जाते हैं तो मदनपुर वासी भठ्ठियों की आग की तपिश दिन – रात महसुस करते हैं। अभी मदनपुर के इलाका में 48 डिग्री के आसपास तापमान पहुँच चुका है। ऐसे में लोगों का जनजीवन बिजली पर ही निर्भर हो चुका है। घर में पंखे या कुलर हो, पेयजल का मोटर हो तथा कृषि कार्य हेतु समर सेबुल पंप आखिर ये सब तो बिजली आधारित ही हैं। बिना बिजली न तो पीनें का पानी ही मिलेगा और न गर्मा शब्जी एवं मुंग / मक्का तथा ईख की फसल को सिंचाई ही । नतीजन कृषक परेशान तो आमजन भी परेशान । किसान के खेतों में शब्जी बिजली के बिना सिंचाई के अभाव में झुलस कर मर जायेंगी – तो नेता, मंत्री एवं अफसर खायेंगे कहाँ से ? इस गर्मी में पैसे वाले खीरा,ककड़ी, तारबुज, टमाटर, लौकी, नेनुआ, करैला की भाजी कहाँ से खायेंगे । किसानों का जब खुन और पसिना जलता है तो पैसे वालों का बी. पी. एवं सुगर ठीक रखनें की शब्जी कद्दू एवं करैला मिलता है। 48 डिग्री की गर्मी में तपते हुए किसान शब्जी उत्पादन कर बाजारों में घुप में बैठक विक्री करता है, ताकी उसकी पत्नि की दबाई एवं बच्चों की पढ़ाई हेतु दस रुपया कमा सके । हम पैसे वाले मोल – मोलई कर सौ रुपया में झोला भरकर मनपसंद शब्जियाँ ले आते हैं, और परिवार के साथ चटकारे मारकर खाते हैं एवं एसी चालुकर आराम फरमाते हैं ।
जरा किसी नें यह सोंचा भी होगा कि यह किसान जो भारतीय अर्थ व्यवस्था की धुरी है, उसका जीवन कैसा होगा ? आधा कच्चा आधा पक्का मकान, एक कोना में गाय, भैंस एवं बकरी दुसरे कोनें में स्वयं सोता है। ऐसे में बिजली की कटौती काफी चिंताजनक एवं पीड़ादायक होता है। खेती के पानी, पीनें का पानी, जानवरों को खान – पान – स्नान सबों में पानी ही चाहिए । बो संभव है 24 x 7 बिजली के उपर । लेकिन बिजली विभाग के बाबू देहाती क्षेत्रों की बिजली में कटौती कर शहरों में दिन – रात बिजली देनें को मजबुर होते हैं । होयें भी क्यूँ न – शहरों में तो एस. पी., डी.एम., नेता, मंत्री, अफसर और खुद बिजली बाबू जो रहते हैं।


