अपनों को अलबीदा कह मृत्यु को प्राप्त हो गये सेवा निवृत शिक्षक सुरेश राम

सुनील कुमार सिंह खबर सुप्रभात समाचार सेवा


कुछ व्यक्ति ऐसे व्यक्तित्व के धनी होते हैं कि जिनकी छाप समाज पर स्थायी रूप से रच – बस जाती है। ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी थें सेवा निवृत शिक्षक सुरेश राम ( 7 0 वर्ष । वैसे तो सुरेश राम जी का मुलतः पैतृक निवास कासमा थाना क्षेत्र का खैरी गाँव था । लेकिन उनका ननीहाल

स्व. सुरेश राम ( सेवानिवृत शिक्षक सह रंगकर्मी )

था मदनपुर नगर पंचायत के ग्राम दशवतखाप ।शिक्षक के पद पर नौकरी पाकर प्रथम नियुक्ति संढ़ैल प्राथमिक विद्यालय में हुई । वे अपनें मामा स्व. राजनाथ राम ग्राम दशवतखाप में रहकर ही रोजाना साईकिल से छः कि.मी. की दूरी तय कर रोजाना शिक्षण कार्य करनें हेतु संढ़ैल आना – जाना किया करते थें। कुछ वर्षों के बाद खिरियावाँ मोड़ के समीप जमीन क्रय कर अपना घर बनाकर सपरिवार रहनें लगे। बाद में उनका स्थानांतरण म. वि. बनिया में हो गया, जहाँ से वे सेवा निवृत हुए । वो अपने पीछे दो पुत्र एवं दो पुत्री छोड़ गये, जो सभी विवाहीत एवं घर गृहस्थी में लगे हैं। दोनों दामाद सरकारी सेवा में हैं । दोनों पतोहु सरकारी शिक्षिका हैं। बड़ा बेटा मुकेश कुमार म. वि. बघौरा ( कासमा ) में प्र. अ. के पद पर सरकारी सेवा में है तो वहीं छोटा बेटा रवि कुमार निजी कम्पनी में अभियंता है।
स्व. सुरेश राम एक योग्य शिक्षक के साथ -साथ एक सफल रंगकर्मी एवं निदेशक भी रहे हैं। दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा या सरस्वती पूजा के सुअवशर पर मदनपुर क्षेत्र में जहाँ भी ड्रामा खेला जाता था, तो डायरेक्टर के रूप में एक ही नाम होता था – वो सुरेश राम का । अरावली का शेर में महाराणा प्रताप का रोल, भीष्म प्रतिज्ञा में श्री कृष्ण का रोल, चम्बल की माटी में डाकु मोहर सिंह का रोल आज भी क्षेत्र वासियों के मन-मस्तिष्क में सुरेश राम छाये हुए हैं।
लेकिन नियती को भी सुरेश राम रास नहीं आये । कुछ ही दिनों की गंभीर बिमारी नें रविदास जयंती माघ पुर्णिमा के दिन ( रविवार ) के ग्यारह बजे अंतिम साँस लेकर इस मृत्युलोक से गमन कर श्री धाम को चल बसे। आज मंगलवार को भारी चाहनें वाले लोगों की उपस्थिति में दशवतखाप के श्मशान घाट में ही पंच तत्वों में विलीन हो गये।