औरंगाबाद:खबर सुप्रभात समाचार सेवा
बिहार के डिप्टी सीएम व हेल्थ स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी जी यह तस्वीर देखिए । तस्वीर को देखकर आपको समझ में आ जाएगा कि स्वास्थ्य ब्यवस्था में सुधार के आपके प्रयासों को कैसे डॉक्टरों द्वारा ठेंगा दिखाया जा रहा है।यह तस्वीर बेहतर सेवा देने के मामले में आइएसओ सर्टिफिकेशन प्राप्त

औरंगाबाद के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल सदर अस्पताल की है। तस्वीर में साफ देख सकते है कि अस्पताल के आपरेशन थिएटर में महिलाएं ऑपरेशन टेबल पर लेटी हुई है। इनका बंध्याकरण ऑपरेशन किया जाना है। दिन भर ये प्री-ऑपरेशनल ट्रीटमेंट के दौर से गुजर चुकी है। दिन में इनका वह सब जांच किया जा चुका है, और वह सब दवाएं दी जा चुकी है, जो मरीज का किसी तरह का ऑपरेशन करने के लिए जरूरी होती है। तीन महिलाओं का बंध्याकरण ऑपरेशन होना है। गुरुवार को देर शाम इन तीन महिलाओं में से दो को ऑपरेशन थिएटर में लाकर ऑपरेशन टेबल पर लाया जाता है। एक महिला को वेटिंग में ऑपरेशन थिएटर के बाहर रखा जाता है। ऑपरेशन थिएटर के अंदर ऑपरेशन टेबल पर लिटाई गई दोनों महिलाओं के शरीर पर ऑपरेशनल कपड़े डाल दिए जाते है। ऑपरेशन टेबल पर कैंची, छूरी और अन्य साजों सामान रख दिए जाते है। अब इन्हे बेहोश करने के बाद सिर्फ ऑपरेशन करने भर की देरी है। इस बीच लेडी डॉक्टर की ऑपरेशन थिएटर में एंट्री होती है। वें दोनों पेशेंट्स को देखती है। देखने के बाद अचानक से वह यह कह कर चल देती है कि वें ऑपरेशन नही करेगी। फिर परिजन हो हल्ला करने लगते है कि दिन भर अस्पताल में रखकर ऑपरेशन टेबल पर लिटाने के बाद ऑपरेशन नही करना गलत है। यह सब सुनने के बावजूद डॉक्टर नही रुकती है और वह अस्पताल से चली जाती है।इस मामले की जानकारी सांसद प्रतिनिधि मृत्युंजय सिंह को मिला और उनके द्वारा तत्काल संज्ञान लिया जाता है। जानकारी मिलने पर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. सुनील कुमार और डीपीएम पेशेंट्स के परिजनों के बताए अनुसार उन्हे बताया जाता है कि डॉ. ऋचा चौधरी तीनों मरीजों का बंध्याकरण ऑपरेशन करने आई थी और बिना ऑपरेशन किए ही चली गई। यह जानकारी देने के बाद दोनों यह कहकर डॉक्टर का बचाव करते है कि डॉ. ऋचा चौधरी की ऑपरेशन के लिए ड्यूटी नही लगी थी, वें रोस्टर देखकर ही बता सकते है कि किस डॉक्टर की ड्यूटी थी। यह भी कहा कि वें डॉक्टर को बुला रहे है। ऑपरेशन हो जाएगा। इसके कुछ देर बाद डॉक्टर आशुतोष आते है और ऑपरेशन करते है।पेशेंट्स के परिजनों का आरोप है कि डॉ. ऋचा चौधरी ऑपरेशन करने आई थी। इसी दौरान उन्हे एक कॉल आया। कॉल आने के बाद वें ऑपरेशन किए बगैर अपने प्राईवेट अस्पताल चली गई। एक मरीज के परिजन ने बताया कि वह अपनी बहन प्रियंका देवी का बंध्याकरण ऑपरेशन कराने सदर अस्पताल आए थे। देर शाम बहन को ऑपरेशन थिएटर में लाया गया। डॉ. ऋचा चौधरी ऑपरेशन करने आई लेकिन एक कॉल आने के बाद वह चली गई। कहा कि डॉक्टर का शहर में ही अपना प्राईवेट हॉस्पिटल है और कॉल आने के बाद वें बिना ऑपरेशन किए ही चली गई। इसकी भनक जैसे ही सांसद औरंगाबाद के कार्यालय में मिली तो सांसद प्रतिनिधि मितेन्द्र सिंह ने मामले पर संज्ञान लिया और तब महिलाओं का आपरेशन किया गया। जिन महिलाओं का बंध्याकरण ऑपरेशन किया गया, उनमें बारूण थाना के धमनी गांव निवासी प्रवेश ठाकुर की पत्नी प्रियंका देवी, औरंगाबाद मुफ्फसिल थाना के रेणु बिगहा निवासी विकास सिंह की पत्नी प्रीति देवी एवं कुटुम्बा थाना के नरेंद्रखाप निवासी हरिशंकर राम की पत्नी प्रियंका कुमारी शामिल है।औरंगाबाद सदर अस्पताल और इसके चिकित्सक लगातार अपनी लपरवाही और मनमानेएवं कार्यों को लेकर चर्चे में रहते है। इसे लेकर हमेशा सदर अस्पताल हंगामे का गवाह बनता रहता है। ऐसा ही मामला गुरुवार को देर शाम का रहा, जहां सदर अस्पताल में पदस्थापित महिला चिकित्सक डाॅ. ऋचा चौधरी ऑपरेशन थियेटर के बेड पर महिला मरीजों को छोड़कर भाग गई। फलस्वरूप परिजन परेशान हो उठे।और मरीज ने वरीय चिकित्सकों को इसकी जानकारी दी। जब इसकी जानकारी ऑपरेशन बेड पर बंध्याकरण के लिए आई तीन महिलाओं को छोड़कर महिला चिकित्सक के भाग जाने की जानकारी अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. सुनील कुमार एवं डीपीएम अनवर आलम को मिली तो इसके बाद डॉ. आशुतोष को बुलाया गया और तीनो महिलाओं का ऑपरेशन हुआ।इस संबंध में पूछे जाने पर सिविल सर्जन ने खबर सुप्रभात को बताया कि मामले में ड्यूटी पर तैनात डाक्टरों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। पुछे जाने पर सिविल सर्जन ने आगे बताया कि डेंगू का ईलाज सदर का अस्पताल में बेहतर ढंग से किया जा रहा है। मरीजों को किसी प्रकार का परेशानी न हो इसका पुरी तरह से ख्याल रखा जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को तत्काल बेहतर इलाज के लिए रेफर किया जाता है।