सुनील कुमार सिंह खबर सुप्रभात सामाचार सेवा
मदनपुर थाना क्षेत्र में झोला छाप डॉक्टरों की बल्ले – बल्ले है। प्रशासन की नाक के नीचे हर गली, चौक चौराहे पर ऐसे अस्पताल में मौत के सौदागर प्रशासन की मिली – भगत से ईलाज करते देखे जाते हैं। विते कुछ माह पूर्व मदनपुर शहर के तपसी नगर एवं बिचली गली में ऐसे सौदागरों नें दो व्यक्तियों को अलग – अलग ईलाज के क्रम में हत्या कर डाली थी । काफी हंगामा के बाद दोनों अस्पताल को सील किया

गया । ऐसा ही एक नया मामला दो दिन पूर्व खिरियावाँ बाजार के भवानी मेडिकल में भी देखनें को मिला । यहाँ सलैया थाना क्षेत्र के हसनपुर निवासी केसहर यादव के पाँच वर्षिय मासुम बालक आयुष कुमार को ईलाज के लिए लाया गया । उसे कई दिनों से बुखार लगा था । भवानी मेडिकल के झोला छाप डॉक्टर दिलीप कुमार नें ईलाज शुरू किया । नतीजन मरीज आयुष कुमार की हालत और ज्यादा खराव होने लगी । उसका पुरा शरीर फुलने लगा। आयुष की माँ सुहागा देवी एवं चाचा बचन यादव नें इसकी शिकायत दिलीप कुमार से किया । इलाज कर रहे दिलीप कुमार नें कहा कि दवा गलत मिल गया है, जिससे ऐसी हालत हो गयी है । रुकिये, दवा दुसरा देते हैं एवं पानी चढ़ा देते हैं सब ठीक हो जायेगा । पानी में नींद की दवा होनें से बच्चा आयुष सो गया तब डॉक्टर दिलीप नें कहा कि अब घर ले जाईये । बच्चा सो गया है, सब ठीक हो जायेगा । लेकिन बच्चा शुक्रवार को ही दम तोड़ दिया । शनिवार को परिजन रो – विलख कर मृत पाँच वर्षिय आयुष को सनातन पद्धति के अनुसार दफना दिया । उसके बाद परिजनों नें खिरियावाँ बाजार पहुँचकर भवानी मेडिकल के सामनें हल्ला मचानें लगे । तभी चुपके से संचालक दिलिप कुमार शटर बंद कर फरार हो गया । स्थानिय जन प्रतिनिधियों नें बिच – बचाव एवं पहल कर दो लाख में मामला तय कर हंगामा बंद कराया । अब सवाल उठना लाजिमी है कि क्या मासुम की जान की किमत सिर्फ दो लाख रुपये है ? क्या ऐसे झोला छाप चिकित्सक और कितनें की जान लेंगें ? आखिर इन मौत की दुकानों को कौन बंद करायेगा ? इन मौन के सौदागरों पर कारवाई कौन करेगा ? पुछती है मदनपुर की जनता- – स्थानिय प्रशासन, जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री एवं मुख्यमंत्री से ?