श्रम कार्यालय में मजदूर दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन

नवादा से डीके अकेला की रिपोर्ट

नवादा नगर अंतर्गत आई टी आई के पास अवस्थित संयुक्त श्रम कार्यालय,नवादा में काफ़ी घुमधाम से अंतरराष्ट्रीय मजदुर दिवस सफल ढंग से मनाया गया।
इसकी अध्यक्षता सह उद्घाटन श्रम अधीक्षक, नवादा ने की। श्रम अधीक्षक, नवादा सुनील कुमार, पूर्व वरिष्ठ अधिकारी सह चर्चित समाज सेवी सुबोध कुमार ने कहा कि यह दिवस मजदूर दिवस नहीं,बल्कि यह मजदूर शहादत दिवस के रूप में मनाना चाहिए। मजदूर दिवस की उत्पत्ति से लेकर अबतक के मजदूर आंदोलन का संक्षिप्त इतिहास पर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि १८८६ ई. में अमरीका के शिकागो शहर में मजदूर को शोषण दमन से मुक्ति और अपने न्यायोचित मांगों व हक-अधिकार प्राप्त करने के उद्देश्य से मजदूर ने हड़ताल किया था। वहां पूंजीवादी क्रूर शासकों की लाड़ली पुलिस मिलिट्री ने हड़तालियों को गोली से मिर्मतापूर्वक भून डाला था।
मजदूर आंदोलन को कुचलने के लिए नृशंस बेशर्मी से गोली कांड का अंजाम दिया,पर आंदोलन दबने के बजाय संपूर्ण दुनिया में मजदूर आंदोलन दावानल का स्वरूप ग्रहण कर लिया।शोला बन कर प्रतिरोध संघर्ष के रूप में उभरा।अंततोगत्वा पूंजीपतियों को घुटने टेकने के लिए मजबूर होना पड़ा और उनकी जायज मांगें माननी पड़ी। हड़ताली मजदूरों की मूल मांगों में आठ घंटा काम,आठ घंटा आराम एवं आठ घंटा मनोरंजन करना था। जिसे दुनिया के नव निर्माता जुझारू मजदूरों की सांगठनिक ऐतिहासिक लड़ाकू जीत के रूप में विश्व विख्यात है।श्रम अधीक्षक अपने उद्घाटन के दौरान स्वागत भाषण में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नवादा द्वारा चलाए जा रहे विधिक जागरूकता कार्यक्रम के बारे में बहुत विस्तार से बताया। साथ ही सरकार प्रदत्त कई तरह की सुविधाओं का सिर्फ़ जिक्र ही नहीं किया, बल्कि यथासंभव लाभ उठाने की अपील की।अग्रगामी निर्माण कर्मचारी कामगार संघ, बिहार के प्रदेश महासचिव दिनेश कुमार अकेला ने मजदूर आंदोलन और सरकारी दमन का संबंध चोली और दामन का रहा है। अकेला ने आगे कहा कि आज मजदूर यूनियनों की राजनीतिक लड़ाई अवसरवादी नेतृत्व के चक्कर में आर्थिक लड़ाई में सिमट कर रह गई है। व्यवस्था परिवर्तन से कोसों दूर होकर अवसरवादी संसदीय यानी सिर्फ कुर्सी तक सिमट कर रह गई है। सांगठनिक सुदृढ़ीकरण का न हो पाना भी आंदोलनात्मक ह्रास का मूल कारण है। यह सर्वविदित है कि सरकारी उपेक्षात्मक रवैया के चलते आज मजदूरों की समस्याएं कमने के बजाय और गुणात्मक बढ़ा है। इससे निजात पाने के लिए शांतिपूर्ण जनतांत्रिक तरीके से संगठित मजदूर आंदोलन और जुझारू व सशक्त मजदूर यूनियन की सख्त जरूरत है, जो मौजदा वक्त की सबल मांग है।सुबोध कुमार ने कहा कि आज हम सबों से अब साइबर अपराधियों से सतर्क रहने के साथ ही उसके लोभ के घनचक्कर में कदापि न पड़े। मजदूरों को श्रम कानूनों और अधिनियमों की जानकारी भलि भांति होनी चाहिए। सरकार प्रदत्त योजनाओं की जानकारी के साथ ही लाभ उठाने के लिए दृढ़ता और साहस के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। अपनी समस्याओं का स्थाई समाधान हेतु के खुद पहल करें, सफलता अवश्य मिलेगी।