वीडब्लूडीसी का हुआ वर्चुअल उद्घाटन

अम्बुज कुमार खबर सुप्रभात समाचार सेवा

व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद में पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू द्वारा अस्थाई वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेन्टर ( संवेदनशील गवाह साक्ष्य केंद्र)का वर्चुअल उद्घाटन किया गया जिसमें निरीक्षी जज व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद सह न्यायमूर्ति हाईकोर्ट पटना अनिल

कुमार सिन्हा के गरिमामयी उपस्थित में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ,इस अवसर पर व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद के प्रधान जिला जज राजीव रंजन कुमार, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश अरूण कुमार, जिला जज प्रथम विश्व विभूति गुप्ता, जिला जज द्वितीय अंननदिता सिंह जिला जज तृतीय अशोक कुमार गुप्ता, जिला जज चतुर्थ दिव्या वरिष्ठ जिला जज पंचम उमेश प्रसाद जिला जज छः लक्ष्मीकांत मिश्रा, जिला जज सप्तम संतोष कुमार मिश्रा, जिला जज अष्टम मनीष जयसवाल, जिला जज नवम पंकज पांडेय,स्पेशल उत्पाद कोर्ट जज विवेक कुमार सिंह व कन्हैया प्रसाद यादव जज,सिजेएम लाल बिहारी पासवान,सबजज वन फहद दिवान खां,सबजज संदीप कुमार सिंह,एसडीजेएम अनीस कुमार सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारीयों, पूर्व लोक अभियोजक पुष्कर अग्रवाल, जिला विधिज्ञ संघ औरंगाबाद के अध्यक्ष विजय कुमार पाण्डेय सचिव जगनरायण सिंह, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह सचिव सिद्धेश्वर विद्यार्थी सरकारी अधिवक्ता वृजा प्रसाद सहित सेकडो अधिवक्ता उपस्थित थे, अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि यह असुरक्षित गवाह केंद्र जिसे कमजोर गवाह बयान केंद्र या विडियो गवाही केंद्र भी कहा जाएगा इसमें संवेदनशील गवाह, कमजोर गवाह, असुरक्षित गवाह, मानसिक रूप से कमजोर गवाह, विकलांग गवाह के गवाही योजना का उद्देश्य उनके खतरे को आंकलन और सुरक्षा उपायों के आधार पर उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए इसकी स्थापना हुई है,
यह सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति डी वाई चन्द्रचूड के पीठ के आदेश पर शुरू किया गया है इससे गवाह संरक्षण योजना 2018 के अनुपालन में लाभ होगा और गवाहों के डराने धमकाने के शिकायतों में कमी आएगी, व्यवहार न्यायालय ई कोर्ट प्रोजेक्ट नोडल ऑफिसर सह सबजज अष्टम एसिजेएम सात संदीप कुमार ने बताया कि असुरक्षित गवाह केंद्र के स्थापना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना कि गवाह विशेषकर बच्चों और योन शेषण के पीड़ितों को न्याय प्रक्रिया के दौरान कोई अघात ने झेलना पड़े, दुसरे बात गवाहों को आरोपी के डर से गवाही बदलने या मुकरने से रोकना, तीसरी बात सुरक्षित वातावरण देना जहां गवाह डर भय से असुरक्षित महसूस न करे,चोथी बात की गवाह और आरोपी का आमना-सामना न हो गवाही के दौरान और आते जाते वक्त आंख न दिखाएं, पांचवीं बात गवाही मुख्य कोर्ट रूम से अलग एक विडियो स्किन के माध्यम से रिकार्ड की जाती है,यह अदालत परिसर का सबसे विशेष और सुरक्षित कमरा होता है जो योन अपराध से पीड़ितों, बच्चों, मानसिक रूप से बीमार या डरे हुए गवाह को आरोपी के सामने आए बिना बिना डर या दबाव के वीडियो क्रॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से गवाही देने का सुविधा प्रदान करता है यह सुविधा योन उत्पीड़न के मामलों और अन्य जघन्य अपराधों के मामले में पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करता है, वीडब्ल्यूडीसी के उद्घाटन होने पर अधिवक्ताओं ने हर्ष व्यक्त किया है, अस्थाई असुरक्षित गवाह केंद्र 31 मार्च 2026 से कार्य करना शुरू कर देगा इसका क्रियान्वयन हाईकोर्ट पटना के आदेश से जिला विधिक सेवा प्राधिकार औरंगाबाद के सचिव न्यायधीश तान्या पटेल के देखरेख में शुरू किया गया है और उन्हीं के अधिनस्थ यह केंद्र कार्य करेगी।