औरंगाबाद ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा
औरंगाबाद मंडल कारा में भय आतंक और असुरक्षा का माहौल क़ायम है। इसके लिए कुछ चाटुकार बंदियों और जेल प्रशासन अनैतिक रूप से जिम्मेदार है।जेल अधीक्षक डॉ दीपक कुमार के रूतबा भी आसमान पर है। चर्चा है कि जेल अधीक्षक शासन सत्ता के सरंक्षण में ही जेल में बंदियों का जम कर शोषण हो रहा है। बंदियों द्वारा विरोध करने पर प्रताड़ित करने, पिटाई करने,झुठे आरोप लगाकर माफीनामा लिखवाया जाता है यहां तक कि सीपाही(कक्षपाल)व चाटुकार बंदियों द्वारा पिटाई करने,सेल में बंद करने तथा जेल स्थानान्तरण करने के अलावे अन्य कई तरह से परेशान किया जाता है। बंदियों के रहने वाले वार्डों के बरामदे में सीसीटीवी कैमरा गवाह है कि बरामदे में दो से तीन हजार रुपए तक का होटल चल रहा है। जो सक्षम व संपन्न बंदी हैं वे प्रती माह दो से तीन हजार रुपए देकर खाना खा रहे हैं लेकिन जो गरीब असहाय व लचार बंदी है उन्हें जो सरकारी फाइल पर खाना मिलता है वह अत्यंत घटिया स्तर का होता है। खाना बंटते समय यदि अचानक जांच हो तो सच्चाई प्रकाश में आयेगा तथा बरामदे में लगे सीसीटीवी कैमरा खंगालने पर सचाई प्रकाश में आयेगा।जो बंदी जेल से जमानत पर बाहर आये हैं वे निर्भीक होकर सच्चाई बता सकते हैं। यदि कभी कभार जांच करने कोई भी अधिकारी आते हैं तो पहले ही जेल प्रशासन को जानकारी मिल जाता है और बचने छुपाने का सभी हथकंडा अपना लिया जाता है। बंदियों को मिलने वाले दुध से जेल कैंटीन में रसमलाई,पेंडा, काला जामुन, रसगुल्ला,चाय बना कर ऊंची दामों पर बिक्री किया जा रहा है। जेल मेन्यू के अनुसार बंदियों को कभी भी खाना नसीब नहीं हो रहा है।जेल प्रशासन द्वारा जेल मेन्युअल का हवाला देते हुए तम्बाकू (खैनी) पर प्रतिबंध लगाया गया है लेकिन सच्चाई यह है कि जेल में सोना चांदी के भाव में चाटुकार बंदियों तथा (कक्षपाल) के सांठ गांठ से खैनी का बिक्री धड़ल्ले से होता है। अब सवाल यह उठता है कि जेल मेन्युअल के अनुसार कारा में बंदियों को तम्बाकू (खैनी) नहीं आने दिया जाता है तो फिर सघन जांच और चेकिंग के बावजूद कारा में तम्बाकू (खैनी) ऊंची दामों पर बिक्री के लिए कैसे पहुंच रहा है। जेल में बंदियों को बात करने के लिए टेलिफोन बुथ स्थापित है लेकिन उसी बंदियों का नम्बर टेलिफोन बुथ में प्रतिष्ठापित किया गया है जाता है जो 2-3सौ रुपये चुकाते हैं। यदि स्वतंत्र जांच एजेंसी गठीत कर मामले का उच्च स्तरीय जांच कराया जाये तो सच्चाई प्रकाश में आयेगा। बंदियों से जेल में घांस कटवाने से लेकर पैसा उगाही का मामला भी प्रकाश में आयेगा।
